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एक पार्षद ने हां और ना दोनों पर मुहर लगा बदल दी बाजी

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A councilor changed the stamp on both yes and no - फोटो : CharkhiDadri
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विपक्षी खेमे का नप चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का मंसूबा शुक्रवार को ध्वस्त हो गया। गुप्त मतदान हुआ और इसके चलते विपक्षी खेमा उस पार्षद की पहचान भी नहीं कर पा रहा है, जिसका मत रद्द हुआ है। सूत्रों के अनुसार एक पार्षद ने बेल्ट पेपर पर अविश्वास प्रस्ताव लाने के सामने दिए हां और ना के दोनों विकल्पों पर मुहर लगा दी। रिटर्निंग अधिकारी एसडीएम विरेंद्र सिंह ने इस पार्षद के मत को अयोग्य घोषित कर रद्द कर दिया। एक वोट का रद्द होना चेयरमैन की कुर्सी बचने का टर्निंग प्वाइंट रहा।
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मतदान प्रक्रिया को संपन्न करवाने के लिए एसडीएम विरेंद्र सिंह सुबह 10:58 बजे लघु सचिवालय के सभागार में पहुंचे। सुबह 11:15 बजे पार्षदों ने प्रवेश किया। 11:03 बजे नगर परिषद सचिव प्रशांत पराशर ने बाहर आकर वोटिंग प्रक्रिया शुरू करवाने की बात कही। 12:37 बजे पार्षद सभागार से बाहर निकले। एसडीएम विरेंद्र सिंह ने बताया कि चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक वोट से गिर गया है। अविश्वास प्रस्ताव लाने के पक्ष में 13, जबकि न लाने के पक्ष में एक मत मिला। 15वां मत अयोग्य होने के कारण रद्द किया गया है। चुनाव प्रक्रिया बेल्ट पेपर से संपन्न करवाई गई। विपक्षी खेमा यह बोलने को तैयार नहीं है कि दोहरा खेल किस पार्षद ने खेला।
आठ महीने पहले शुरू हुई थी कवायद
चेयरमैन को कुर्सी से हटाने के लिए विपक्षी खेमे ने आठ माह पहले कवायद शुरू कर दी थी। फरवरी में 14 पार्षदों ने तत्कालीन डीसी को चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए शपथ पत्र सौंपे थे। इसके बाद प्रशासन ने बैठक की तिथि तय कर दी थी और इधर चेयरमैन संजय छपारिया हाईकोर्ट से अविश्वास प्रस्ताव पर स्टे ले आए थे। स्टे के चलते बैठक नहीं हो पाई। गत दो अक्तूबर को चेयरमैन ने स्टे याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद प्रशासन ने वोटिंग के लिए 30 अक्तूबर को सुबह 11 बजे समय निर्धारित किया था।
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अब नहीं ला सकेंगे चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
नप चेयरमैन के खिलाफ विपक्षी खेमा अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकेगा। नप कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा होने में करीब सात माह बचे हैं। कार्यकाल पूरा होने में छह माह की अवधि शेष रहने पर अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। संजय छपारिया के पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का एक मुख्य कारण अविश्वास प्रस्ताव का गिरना भी है। एक बार अविश्वास प्रस्ताव गिरने पर अगले छह माह तक दोबारा नहीं लाया जा सकता है। 22 मई 2021 को नप कार्यकारिणी का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा।
शहरी विकास में रोड़ा बने लोग अब हटे पीछे : चेयरमैन
मतदान परिणाम के बाद चेयरमैन संजय छपारिया मीडिया से भी मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि बैठक कक्ष में मौजूद सभी पार्षदों ने अपने विवेक और सूझबूझ से मतदान किया है। इस परिणाम से मेरे राजनीतिक विरोधियों को जरूर सबक मिलेगा, जिन्होंने ये षड्यंत्र रचा था। मैं ऐसे लोगों को कहना चाहूंगा कि वो शहरी विकास में रोड़ा बनने की बजाय पीछे हट जाएं।
पार्षदों का फैसला हमें मंजूर : वाइस चेयरमैन
नप वाइस चेयरमैन दीपक श्योराण ने बताया कि यह फैसला पार्षदों ने किया है, जो हमें मंजूर है। एक मत रद्द होना टर्निंग प्वाइंट रहा। मतदान प्रक्रिया गुप्त थी और इसके चलते यह नहीं कह सकते कि किस पार्षद ने ये दोगली चाल चली है। चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने की संभावना थी।
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वर्जन
नप चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए वोटिंग शांतिपूर्वक संपन्न हुई। एक वोट से चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं हो पाया।
विरेंद्र सिंह, एसडीएम

A councilor changed the stamp on both yes and no- फोटो : CharkhiDadri

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