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Charkhi Dadri News: मानसून सीजन में औसतन से 98 एमएम कम हुई बारिश

Sat, 16 Sep 2023 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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चरखी दादरी से सटे गांव रावलधी में ट्रैक्टर से सूखे खेत की जुताई करता किसान।
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चरखी दादरी। मानसून सीजन विदाई की ओर है। इस बार भी मानसून की बारिश औसत से कम दर्ज की गई है। अगस्त व सितंबर माह सूखा बीता है। सर्वाधिक जुलाई माह में 170 एमएम बारिश दर्ज की गई। जिले में इस मानसून सीजन में 352 एमएम बारिश दर्ज की गई है। 2016 में 576 एमएम बारिश हुई थी। वहीं, विशेषज्ञों की मानें तो मानसून की औसत बारिश 450 एमएम होनी चाहिए।
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जून मध्य से प्री- मानसून की बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। शुरुआत में ही लग रहा था कि इस बार मानसून की बारिश अच्छी होगी। किसानों ने जून में हुई 85 एमएम बारिश में बाजरा, ग्वार, ज्वार, मूंग आदि की अगेती बिजाई कर दी थी लेकिन अगस्त व आधा सितंबर माह सूखा बीतने पर फसलों का पकाव ठीक प्रकार से नहीं हो सका। वहीं जुलाई में सर्वाधिक 170 एमएम बारिश हुई। शुरुआत में फसलों का विकास एवं वृद्धि ठीक प्रकार से हुई लेकिन बाद में बारिश नहीं होने पर नुकसान हुआ है।
जानिये... वर्ष 2014 से 2023 तक हुई बारिश के आंकड़े
वर्ष - बारिश हुई
2014 -207 एमएम
2015-309 एमएम
2016-576 एमएम
2017-315 एमएम
2018-183 एमएम
2020- 289 एमएम
2021- 512 एमएम
2022 347 एमएम
2023- 352 एमएम
- 1.21 लाख हेक्टेयर है कृषि योग्य रकबा
जिले का कुल कृषि योग्य क्षेत्र 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। जुलाई माह में कई भागों में जलभराव होने पर फसलों में नुकसान भी हुआ है। लगातार ह्यूमिडिटी बनने की वजह से खासकर कपास की फसल में कीट व रोगों से नुकसान भी हुआ है। इसी प्रकार बाजरा की फसल को पकाव के समय नुकसान हुआ। अगस्त व सितंबर माह में बारिश नहीं होने पर दाने की गुणवत्ता गिर गई।
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किसान बोले: आखिरी टैम पै डोब गया रामजी
किसान भाेलूराम, जयपाल, हरेंद्र व ढिल्लूराम का कहना है कि रामजी नै आखरी टैम पर डोब दिया। रामजी नै पूरा सामण व भादवा सूखा तार दिया। जै अगस्त और सितंबर महीने में बारिश हो जाती तो रबी की फसलों की बिजाई का काम उनके लिए आसान हो जाता। सरसों के लिए खेतों में नमी बनी रहती जिससे बिना सिंचाई किए इसकी बिजाई हो जाती। अब सिंचाई करके सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी, जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च और बढ़ जाएगा। बरानी एरिया में किसानों के लिए रबी की फसलों की बिजाई का कार्य और मुश्किल हो जाएगा। औसत से कम बारिश होने पर भूमिगत जलस्तर में भी कोई इजाफा नहीं हो सका है। खासकर जिले के डार्क जोन में भूमिगत जलस्तर यथावत है।

अगस्त व सितंबर सूखा रहने से किसान के समक्ष समस्या बनी हुई। किसानों को अब सरसों की बिजाई सिंचाई करके ही करनी पड़ेगी जिससे लागत खर्च बढ़ जाएगा। इस बार भी औसत से कम बारिश हुई है।
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-डॉ. चंद्रभान, कृषि विशेषज्ञ

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