फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Charkhi Dadri News: मुआवजा राशि में 80 प्रतिशत कटौती, किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू

विज्ञापन
धरना शुरू करने से पहले रोष जताते किसान।
विज्ञापन
चरखी दादारी। राजस्व विभाग की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा न मिलने से किसान खफा है। सोमवार को किसानों ने इसके विरोध में एसडीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। इस दौरान सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। किसानों ने प्रशासन पर उनकी समस्याओं को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया और 20 दिन बाद बड़ी सभा कर कड़ा फैसला लेने की चेतावनी दी। दूसरी ओर किसानों के धरने के मद्देनजर एसडीएम कार्यालय में पुलिस बल तैनात रहा।
विज्ञापन

हरियाणा किसान यूनियन संगठनों के पदाधिकारी सोमवार को एसडीएम कार्यालय परिसर में फसल खराबे के मुआवजे में 80 प्रतिशत कटौती करने के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गए। इस मौके पर उन्होंने पटवारी द्वारा तैयार की गई एपीआर रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा देने और एसडीएम कार्यालय में पेंडिंग शिकायतों की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। धरने पर बैठे किसानों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि जब तक सरकार किसानों को एपीआर रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा नहीं देती और पेंडिंग पड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं कराती तब तक प्रतिदिन दो गांव से 10-10 किसान धरने पर पहुंचेंगे।
इसके अलावा 26 जून को नई अनाज मंडी में सुबह 10 बजे बड़ी जनसभा की जाएगी। इसके लिए भाकियू का प्रतिनिधिमंडल गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाकर प्रतिदिन पांच गांवों में किसानों की सभाएं कर 26 जून की जनसभा का निमंत्रण देगा। दूसरी ओर धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर ज्ञापन लेने में गंभीरता न दिखाने का भी आरोप जड़ा और नारेबाजी कर अपनी भड़ास निकाली। सोमवार को धरने की अध्यक्षता मास्टर सुरेंद्र कुमार चौहान व जगजीत भागवी ने की।
विज्ञापन


आरोप : 217 करोड़ की जगह सरकार ने दिया 49 करोड़ का मुआवजा

किसान संगठनों के संयोजक जगबीर घसोला ने बताया कि इस बार बेमौसमी बारिश की वजह से किसानों की रबी की फसल खराब हो गई थी। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने बताया कि पटवारियों ने गिरदावरी कर 217 करोड़ 89 लाख 58 हजार रुपये मुआवजा राशि के लिए सरकार को एपीआर भेजी थी लेकिन सरकार ने विभिन्न शर्त लगाकर बजट में 80 प्रतिशत कटौती कर दी। किसानों के खातों में लगभग 49 करोड़ रुपये की राशि बतौर मुआवजे की डाल दी।




इन किसानों को नहीं मिला मुआवजा
- ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज न करवाने वाले किसानों को
- सरकारी बिक्री पर फसल बेचने वाले किसानों को।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकृत किसानों को
- पांच एकड़ से ऊपर खेती करने वाले किसानों को।
भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच करवाने की भी मांग
हरियाणा किसान संगठनों के संयोजक जगबीर घसोला ने बताया कि कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के संबंध में भाकियू संगठन की तरफ से जिला उपायुक्त को शिकायत दी गई थी। इन शिकायतों की जांच के लिए उपायुक्त ने उपमंडल अधिकारी नागरिक को जांच कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त करके निष्पक्ष जांच करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन उपमंडल अधिकारी नागरिक भ्रष्टाचार के आरोपी कर्मचारियों के साथ सांठगांठ करके शिकायतों को पिछले 8 महीने से दबाए बैठे हैं। उनकी तुरंत प्रभाव से निष्पक्ष जांच करवाने व आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।



ये रहे मौजूद

इस मौके प्रदेश महासचिव रणबीर फौजी, मीडिया प्रभारी रविंद्र सांगवान, जिला उपाध्यक्ष रामौतार मकड़ानी, महीपाल सांगवान, यादवेंद्र, भलेराम मकड़ानी, धर्मचंद तिवाला, विजय सिंह, हुकम सिंह, मेवा सिंह सहित अन्य गांवों के किसान यूनियन और ग्रामीण कमेटियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें