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कादमा गांव में वीरवार को गिरे ओले। संवाद
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कांहड़ा गांव के खेत में हुई ओलावृष्टि। संवाद
- रबी सीजन की फसल ने तीसरी बार झेली ओलावृष्टि की मार, किसान की पैदावार से लागत खर्च निकलने की बची उम्मीद भी टूटी
- कादमा और बाढड़ा क्षेत्र के करीब दस गांवों में गिरे ओले, फसलों व सब्जियों की खेती को नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी/कादमा। जिले के कई गांवों में वीरवार को बारिश के साथ ओले गिरे। इससे फसलों को नुकसान हुआ है। करीब सात मिनट तक ओले गिरे और इनसे किसानों की अच्छी पैदावार पाने की उम्मीद भी धूमिल हो गई। इस समय सरसों व गेहूं की फसलें पकी हुई हैं। सरसों की कटाई तो शुरू होने वाली है।
क्षेत्र में 27 व 28 दिसंबर को भी ओले गिरे थे। इससे 35 गांवों में 25 हजार एकड़ क्षेत्र में सरसों, गेहूं व अन्य फसलों में 25 से 75 प्रतिशत तक नुकसान हुआ था। सरसों में 50 से 75 प्रतिशत तक नुकसान हुआ था। इसकी राजस्व विभाग सामान्य गिरदावरी भी कर चुका है। किसानों से क्षतिपूर्ति पोर्टल पर नुकसान का विवरण भी दर्ज करवाया जा चुका है।
उसके बाद एक मार्च को ओले पड़े थे। इससे करीब 12 गांवों में 13 हजार एकड़ में नुकसान हुआ। अब वीरवार को मौसम ने फिर करवट ली। सुबह आसमान में बादल छाए रहे। दोपहर तक धूप खिली। उसके बाद वीरवार शाम को तीन बजे गांव कादमा, ऊण, बडेसरा, कांहड़ा, नीमड़, गुडाना, हंसवास कलां, गोपी, भांडवा व दगड़ोली सहित कई गांवों में ओले गिरे। ओलों की मार से सरसों, गेहूं व सब्जी की खेती में नुकसान हुआ है। इस समय फसलें पकी हुई हैं। ऐसे में और भी ज्यादा नुकसान होता है।
- किसान बोले- सरकार खराब फसलों का दे उचित मुआवजा
गांव कादमा की महिला सरपंच चांदपति, महेश कुमार, किसान रविंद्र, विवेक कुमार, रणबीर सिंह, सुरेंद्र, सोमवीर व महासिंह ने बताया कि ओले करीब सात मिनट तक गिरे। खेतों में सफेद चादर बिछ गई थी। इन किसानों ने सरकार से मुआवजा दिए जाने की मांग की है। किसानों ने प्राकृतिक आपदा से पहले हुए नुकसान की भी भरपाई करने की मांग की है।
वर्सन:
रबी सीजन की फसल ने तीसरी बार ओलावृष्टि झेली है। इसके चलते किसानों की फसल में काफी नुकसान हुआ है। सरकार को ओलावृष्टि का जल्द मुआवजा देना चाहिए। किसानों का प्राकृतिक आपदा का कई फसलों का मुआवजा बकाया है।
-जगबीर घसोला, प्रदेश संयोजक, एमएसपी किसान मोर्चा
वर्सन:
सोमवार को ओलावृष्टि प्रभावित गांवों का टीम दौरा करेगी। उस दौरान किसानों के खेतों में जाकर नुकसान का जायजा लिया जाएगा। रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग