- ग्रैप-3 के तहत जिला उपायुक्त के आदेश जारी करने के बाद बिजली निगम ने काटी आपूर्ति, भवन निर्माण सामग्री से भरे वाहनों के आवागमन पर भी रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। प्रदूषण की समस्या से जिले के सात जोन में 325 क्रशर बंद कर दिए गए हैं। इससे करीब 20 हजार श्रमिक परिवार बेरोजगार हो गए हैं। इनके सामने दो जून रोटी का संकट गहरा गया है। यदि क्रशर लंबे समय तक बंद रहते हैं तो 800 ट्रांसपोर्टर्स के समक्ष भी परेशानी खड़ी हो जाएगी। जिले के क्रशर प्रतिमाह विभिन्न विभागों के मार्फत सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व देते हैं।
लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त मुनीश शर्मा ने जिले में धारा 163 जारी कर विभिन्न गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अगर कोई बेकार सामग्री, कूड़ा आदि जलाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जिलाधीश के आदेशों के अनुसार, स्टोन क्रशर चलाने वालों और माइनिंग करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसी को ध्यान में रखते हुए बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए कई प्रकार के प्रतिबंध जरूरी हैं। भवन निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के आवागमन पर भी रोक लगाई गई है।
- उपायुक्त के आदेश जारी करने के बाद सिविल अस्पताल में जला कचरा
शनिवार को उपायुक्त ने विभिन्न गतिविधियों के संचालन पर रोक लगाने के साथ ही कचरा जलाने वालों पर कार्रवाई का आदेश दिया। वहीं, दूसरी ओर दोपहर बाद ही सिविल अस्पताल परिसर में पड़े कचरे को किसी ने आग लगा दी।
- जिले के ये हैं क्रशर जोन
जिले के अटेला, बिरही कलां, रामलवास, पांडवान, कलियाणा, खेड़ी बत्तर समेत सात क्रशर जोन हैं। इनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के करीब 20 हजार श्रमिक कार्य करते हैं। इनके संचालन पर रोक लगाने से ये बेरोजगार हो गए हैं। दूसरी ओर क्रशर संचालकों का कहना है कि इसकी मार सीधे तौर पर श्रमिक परिवारों के अलावा ट्रांसपोर्टर्स पर पड़ेगी।
- पांच हजार डंपर और ट्रॉलों के थमेंगे पहिये
ट्रांसपोर्टर्स हरीचंद्र, संदीप, धर्मबीर, धूप सिंह, नरेश, भूप सिंह व भोलू आदि ने बताया कि क्रशर बंद होने से करीब पांच हजार डंपर और ट्रॉले सड़कों पर नहीं दौड़ पाएंगे।। अगर लंबे समय तक ऐसी ही रोक लगी रही तो उनके समक्ष वाहनों की किस्तें भरने का संकट पैदा हो जाएगा। ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स ने मासिक किस्त पर वाहन खरीद रखे हैं।
- हर माह 32 करोड़ बिजली का बिल और सरकार को देते हैं 400 करोड़ का राजस्व
क्रशर संचालकों की मानें तो हर माह क्रशर से बिजली निगम को 32 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। वहीं, क्रशर जोन से सरकार को हर साल करीब 400 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बाद भी प्रदूषण का हवाला देकर क्रशर बंद कर संचालकों को नुकसान पहुंचाया जाता है।
- प्रदूषण का स्तर सुधरने पर ही संचालन की अनुमति मिलने की उम्मीद
गौरतलब है कि प्रदूषण का स्तर चिंताजनक होने पर विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को बंद किया गया है। इस संबंध में निर्देश जारी होते ही बिजली निगम ने सभी क्रशरों के कनेक्शन बंद कर दिए हैं। अब प्रदूषण का स्तर सुधरने के बाद ही इनके संचालन की अनुमति मिलने की उम्मीद है।
- दादरी जिले को एनसीआर से बाहर करवाए सरकार : क्रशर एसोसिएशन
हरियाणा क्रशर एसोसिएशन प्रधान सोमवीर घसोला ने कहा कि सरकार को दादरी जिला एनसीआर से बाहर कराना चाहिए। क्रशर संचालक इस संबंध में केंद्रीय मंत्री तक ज्ञापन सौंप चुके हैं। कई सालों से यह मांग लंबित है। क्रशर संचालक बेहद परेशान हैं। एनसीआर में होने से हर साल प्रदूषण की समस्या बढ़ते ही क्रशर बंद कर दिए जाते हैं।
फोटो 08
जिले का क्रशर जोन। संवाद
फोटो 09
डीसी के आदेश जारी करने के कुछ समय बाद ही सिविल अस्पताल में कचरे को लगाई गई आग। संवाद