विश्व पर्यावरण दिवस पर रोजगार्डन और लघु सचिवालय परिसर में उपायुक्त ने किया पौधरोपण
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिला प्रशासन ने इस साल वन विभाग के माध्यम से करीब 6 पौधे तैयार किए हैं। मानसून की पहली बारिश होते ही जिले में पौधरोपण शुरू कर दिया जाएगा। वन विभाग 1.20 लाख पौधे ग्राम पंचायतों, सरकारी स्कूलों, समाजसेवी संस्थाओं को मुफ्त वितरित करेगा। ये पौधे वन विभाग की 6 नर्सरी में तैयार किए गए हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर रोजगार्डन और लघु सचिवालय परिसर में पौधरोपण करते हुए उपायुक्त मनदीप कौर ने यह जानकारी दी।
उपायुक्त ने कहा कि दुनिया में बिगड़ते जा रहे प्राकृतिक संतुलन को लेकर वैज्ञानिकों सहित हर कोई चिंता व्यक्त कर रहा है। प्राकृतिक असंतुलन के कारण तापमान बढ़ रहा है। इतना ही नहीं ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, जो मानव जाति के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे में हमने अगर पौधारोपण कर उनकी देखभाल की और सकारात्मक कदम उठाएं तो प्रकृति का संतुलन दोबारा सही हो सकता है।
उन्होंने कहा है कि हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। कहने को तो इस दिन वातावरण को लेकर कई कदम उठाए जाते हैं, लेकिन वास्तव में पर्यावरण दिवस पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों से अलग हम सबको मिलकर काम करने की जरूरत है। इस दिन पौधे तो बहुत बड़ी संख्या में लगाए जाते हैं, लेकिन अगले दिन से ही उनकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं होता है। ऐसे में हम सभी को पौधारोपण से लेकर उनके पेड़ बनने तक देखभाल करने की जरूरत है।
उपायुक्त ने कहा कि आज हर कोई जानता है कि पूरी दुनिया में प्रकृति के बिगड़ते संतुलन को लेकर वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं। अभी तक किए गए शोध में सामने आया है कि काफी हद तक इसका कारण पेड़ पौधों की घटती संख्या है। उन्होंने बताया कि प्रकृति हर किसी के लिए कुछ ना कुछ देती ही है। ऐसे में हमें भी प्रकृति के लिए पौधारोपण के कार्य के तौर पर आगे आना चाहिए।
फल-फूल सजावट सहित मिलेंगे 50 से ज्यादा प्रजातियों के पौधे
जिला वन अधिकारी नवल किशोर ने बताया कि मानसून सीजन में शुरू होने वाले पौधरोपण अभियान के लिए नर्सरी में पौधों की खेप तैयार है। विभाग की गांव रामनगर कपूरी, बरसाना, सांजरवास, बाढड़ा, बिंद्राबन एवं बडेसरा में पौधे पॉली बैग में तैयार हैं। इनमें आस्ट्रेलियन टीक, बेलपत्र, सफेद सीरस, नीम, सफेद कचनार, पपीता, करोंधा, कनेर, अमलतास, लेसुआ, शीशम, गुलमोहर, गुगल, जामुन, बरगद, गुलर, पीपल, गुड़हल, आम, हरसिंगार, महागनी, चांदनी, इमली, फरस, अर्जुन, बहेड़ा, गिलोय, बेर, पपड़ी, अलंथस, पिलखन, सहाजन, जावा केसिया, आंवला व कीकर आदि शामिल हैं।