- जिले में मेडिकल ऑफिसर के 75 पद हैं स्वीकृत, 56 पर ही तैनाती, सिविल अस्पताल में सर्वाधिक 19 पद खाली
- तीन पीएचसी में चिकित्सक ही तैनात नहीं, चौथी पीएचसी के चिकित्सक के पास डिप्टी सीएमओ का चार्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मेडिकल ऑफिसर (एमओ) को स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ माना जाता है। दूसरी ओर जिले में इनके 39 पद खाली पड़े हैं। एमओ की कमी का असर सीधे तौर पर 17 स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ रहा है। इससे वहां की सेवाएं बीमार हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय पत्राचार कर खाली पदों को भरने की मांग कर चुका है, लेकिन, नतीजा सिफर है। अहम बात यह है कि मेडिकल ऑफिसर के साथ विशेषज्ञों के पद भी खाली पड़े हैं।
जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्रों पर मेडिकल ऑफिसर के 95 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 56 पर ही तैनाती है। मेडिकल ऑफिसर की कमी के कारण जिले की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो ऐसे हैं, जहां मरीजों को मेडिकल ऑफिसर की सेवा का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है।
दरअसल, जिले की आबादी करीब साढ़े छह लाख से अधिक है। लोगों के लिए जिले में सिविल अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल के अलावा तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 12 पीएचसी संचालित हैं। इसके बावजूद जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के 40 फीसदी पद खाली हैं। इन केंद्रों पर चिकित्सकों के अलावा विशेषज्ञों और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को कई सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले से रोजाना 100 से अधिक मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी रेफर किए जा रहे हैं। इसके साथ ही मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा उपचार लेना पड़ रहा है।
- वेंटिलेटर को चलाने वाला नहीं कोई
स्वास्थ्य विभाग के पास करीब 20 वेंटिलेटर तो हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए कोई फिजिशियन नहीं है। फिजिशियन की तैनाती के लिए स्वास्थ्य विभाग कई बार मुख्यालय को मांगपत्र भेज चुका है, लेकिन नतीजा सिफर है और मरीजों को रेफर करना ही एकमात्र विकल्प है।
- सिविल अस्पताल में 42 में से सिर्फ 23 चिकित्सक
विशेषज्ञों की कमी का सीधे तौर पर असर जिला मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। जिला बनने के बाद भी सिविल अस्पताल उपमंडल अस्पताल की तर्ज पर चल रहा है। सिविल अस्पताल में चिकित्सक के सृजित कुल 42 पदों में से मात्र 23 पर ही तैनाती है। मातृ-शिशु अस्पताल में चिकित्सकों के 5 पद खाली हैं। सात पीएचसी में भी 50 फीसदी चिकित्सक ही तैनात हैं। डिप्टी सीएमओ के पद खाली होने से सात एमओ के पास इनका प्रभार भी है। इससे वे स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं।
विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रयास नहीं आए काम
जिला स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मजबूरीवश मरीजों को भी दूसरे जिले के अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
बिन चिकित्सक के चल रही ये पीएचसी
जिले में सात पीएचसी पर जरूरत के अनुसार 50 फीसदी चिकित्सक ही तैनात हैं। तीन पीएचसी में स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सक ही तैनात नहीं किए हैं। इनमें माईकलां, अचीना और कादमा पीएचसी शामिल हैं। अधिकांश सीएचसी व पीएचसी में चिकित्सकों की कमी से डेंटल सर्जन या फार्मासिस्ट से काम चलाया जा रहा है। वहीं, मानकावास एमओ के पास डिप्टी सीएमओ का चार्ज है। वह भी ज्यादातर दादरी सिविल अस्पताल में रहते हैं।
वर्जन
मेडिकल ऑफिसर के खाली पद भरने के लिए मुख्यालय पत्राचार कर चुके हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सक मिलते ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती कर कमी दूर कर दी जाएगी। तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है।
-डॉ. आशिष मान, डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी सिविल अस्पताल में उपचार करवाने पहुंचे मरीज। संवाद
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कादमा पीएचसी भवन, जहां मेडिकल ऑफिसर ही तैनात नहीं हैं। संवाद