चरखी दादरी। सितंबर माह में संभावित पंचायत चुनाव के मद्देनजर ग्रामीणों के जहन में गांवों के विकास की उम्मीद जगी है। जैसे ही पंचायत चुनाव संपन्न होंगे, नई पंचायतों के बैंक खातों में विकास कार्यों के लिए बजट तैयार मिलेगा। जिले में 168 ग्राम पंचायतें हैं और पंचायत विभाग की प्रत्येक पंचायत को औसतन 50 लाख रुपये का बजट देने की योजना है। 81 करोड़ बजट राशि को गत आठ जुलाई को आयोजित हुई प्रगति रैली में सूबे के मुखिया मनोहर लाल हरी झंडी दिखा चुके हैं और अब विभाग के पंचायत चुनाव संपन्न होने का इंतजार है।
इस समय गांवों में विकास कार्यों की सख्त जरूरत है। छोटे स्तर के विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। ग्रामीण आज भी निवर्तमान सरपंचों के पास शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। सरपचों का चार्ज इस समय बीडीपीओ को सौंप रखा है। बीडीपीओ को भी विकास कार्यों के लिए एसडीएम से अनुमति लेनी पड़ती है तब जाकर गांव में कोई छोटा स्तर का काम हो पाता है।
ऐसे में गांवों में लोग विकास कार्य शुरू होने की बाट जोह रहे हैं। बीडीपीओ को सरपंचों का चार्ज जरूर सौंप रखा है, लेकिन बीडीपीओ के माध्यम से गांव में काम करवाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। इसके तहत ग्रामीणों को लिखित में कार्य की प्रकृति व स्वरूप की जानकारी देनी होती है उसके बाद नीचले स्तर के अधिकारी मौके पर जाकर वास्तविकता व काम की जरूरत का पता लगाता है। उसके बाद बीडीपीओ स्वीकृति देता है। बीडीपीओ के बाद सीमित कार्यों में एसडीएम की अनुमति लेने का भी प्रावधान है, तब जाकर काम हो पाता है। जिले में तीन ब्लॉक है, जिनमें दादरी, झोझू कलां व बाढड़ा शामिल हैं।
अब सीएम की 81 करोड़ के बजट की घोषणा होने के बाद विकास कार्यों की उम्मीद जगी है। सरकार पंचायत चुनावों की घोषणा कभी भी कर सकती है। ऐसे में जब नई पंचायतों का गठन होगा तो नई पंचायतों के बैंक खातों में विकास कार्यों के लिए बजट तैयार मिलेगा। सरपंच बजट से काम शुरू कर सकेंगे। सीएम घोषणा के तहत 81 करोड़ का बजट दिया गया है। ऐसे में अगर औसत देखी जाए तो प्रत्येक गांव को 50 लाख रुपये तक का बजट मिल जाएगा। इसके लिए प्रत्येक पंचायत से विकास कार्यों के एस्टीमेट एवं प्रस्ताव मांगे जाएंगे। उसके आधार पर बजट का आवंटन हो सकेगा।
- इस साल ग्राम पंचायतों को नहीं मिली पीआरआई ग्रांट -
केंद्र सरकार साल में दो बार यह पीआरआई ग्रांट पंचायतों को देती है, लेकिन इस बार फरवरी माह के बाद एक भी पैसा नहीं मिला है। साल में इसके तहत दो किस्त जारी होती हैं। यह बजट गांव की जनसंख्या के आधार पर मिलता है। सरपंच गांवों में विभिन्न प्रकार की छोटी ग्रांटों से नालों, छोटी गलियों व अन्य छोटे मोटे कामकाज करवा लेते थे, लेकिन इस समय यह काम भी ठप पड़े हैं।
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सीएम घोषणा के तहत बजट से गांवों में विकास कार्यों में तेजी आएगी। डेढ़ साल से बकाया काम पूरे हो सकेंगे और तब तक पंचायत चुनाव भी हो जाएंगे।
- रोशनलाल, बीडीपीओ, पंचायत विभाग।