शहर के महेंद्रगढ़ चुंगी के पास की मैनहोल को ठीक करते फीटर।
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चरखी दादरी। जनस्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से स्थायी फीटरों की भर्ती न होने से पेयजल उपभोक्ताओं को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल संबंधी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होने से विभाग के प्रति गहरी नाराजगी बनी हुई हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुख्यालय में कई बार फीटरों की कमी होने के बारे में अवगत कराया, लेकिन लंबा समय गुजर जाने के बाद भी नए फीटरों की भर्ती नहीं हो रही हैं। शहर की आबादी को पर्याप्त पेयजल मुहैया करवाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से 45 साल पहले लगभग 40 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई थी। पेयजल लाइन पुरानी होने की वजह से लगातार जर्जर हो रही हैं। इसके चलते कई स्थानों पर लीकेज होने से घरों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही हैं, लेकिन विभाग के पास केवल 5 फीटर होने से शिकायतों के निपटान में देरी हो रही है। इससे पेयजल उपभोक्ताओं में विभाग के प्रति गहरी नाराजगी बनी हुई है। उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से तुंरत प्रभाव से खाली पड़े फिटरों के पदों को जल्दी से भरवाने की मांग की है, ताकि लोगों की शिकायतों का निपटारा जल्दी हो सके।
हर रोज मिलती है 20 से अधिक शिकायतें
लगभग 80 हजार की आबादी वाले शहर में बिछाई गई 40 किलोमीटर पेयजल की देखभाल के लिए विभाग के पास केवल 5 फिटर ही नियुक्त किए है, जबकि जनस्वास्थ्य विभाग के पास प्रतिदिन 20 से अधिक पेयजल संबंधी शिकायतें पहुंच रही हैं। शहर की बढ़ती आबादी और पेयजल की लंबाई को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं हैं जिससे सभी शिकायतों का निवारण करना संभव नहीं हैं। ऐसे में विभाग को चाहिए कि वो खाली पड़े फिटरों को तुरंत प्रभाव से भरें।
11 फिटरों के पद पड़े हैं खाली
जनस्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल 5 फीटर ही काम कर रहे हैं। वहीं शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए और नियमों अनुसार 16 फिटरों का होना जरूरी है। फिलहाल जनस्वास्थ्य विभाग में 11 पद फिटरों के खाली है। खाली पड़े फीटर पदों की भर्ती होने के बाद शहर की पेयजल संबंधी शिकायतों का निवारण तुरंत प्रभाव से हो सकेगा।
दूषित पेयजल सप्लाई की समस्या
45 साल पहले बिछाई गई पेयजल लाइन लगातार जर्जर होती जा रही है। इसके कारण वार्ड-20 कबीर नगर, एमसी कॉलोनी, वार्ड 14 में लंबे समय से दूषित पेयजल सप्लाई की गंभीर समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोग हर कष्ट निवारण समिति की बैठक में इस मुद्दे को उठाते है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलते रहे हैं।
वर्जन:
मुझे फीटराें के खाली पड़े पदों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, संबंधित जेई ही बता पाएगा कि उन्हें कितने फीटरों की जरूरत है, और कितने चाहिए।- मोहन लाल, एसडीओ जनस्वास्थ्य विभाग