चरखी दादरी। शहर में आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता सही नहीं है और इसके सेवन से लोग बीमारियों का शिकार बन सकते हैं। ये हम नहीं बल्कि गत पांच माह में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिए गए पानी के सैंपलों की रिपोर्ट कह रही है। स्वास्थ्य विभाग ने गत फरवरी से लेकर जून तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 45 सैंपल लिए, जिनमें से 22 बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट और 6 आर्थोटोलीडाइन टेस्ट में फेल पाए गए।
बता दें कि स्वास्थ्य विभाग हर माह में बूस्टिंग स्टेशन समेत लोगों के घरों से पानी के सैंपल लेकर आर्थोटोलीडाइन और बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट करता है। गत फरवरी से लेकर अब तक 45 सैंपल लिए गए हैं। बैक्ट्रोलॉजिल टेस्ट की बात करें तो 22 सैंपलों की रिपोर्ट फेल आई है। 12 सैंपलों की रिपोर्ट मध्यम और 10 सैंपलों की रिपोर्ट संतोषजनक पाई गई है।
वहीं, अगर आर्थोटोलीडाइन टेस्ट की बात करें तो 6 सैंपल फेल पाए गए जबकि 39 सैंपलों की रिपोर्ट मध्यम और संतोषजनक पाई गई। ऐसे मे स्पष्ट है कि जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में सप्लाई किया जा रहा पानी बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट में खरा नहीं उतर पा रहा। हालांकि क्लोरिन की मात्रा सप्लाई किए जा रहे पानी में ठीक मिल रही है। अप्रैल की बात करें तो बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट में पांच में से तीन बूस्टिंग स्टेशन की सैंपल रिपोर्ट असंतोषजनक पाई गई थी। इसके अलावा एक बर्फ फैक्टरी का सैंपल भी असंतोषजनक पाया गया था।
- आर्थोटोलीडाइन टेस्ट में इन बूस्टिंग स्टेशन के सैंपल हुए पास
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गत पांच माह में हीरा चौक बूस्टिंग स्टेशन, सिविल अस्पताल बूस्टिंग स्टेशन, रविदास बस्ती बूस्टिंग स्टेशन, रोज गार्डन बूस्टिंग स्टेशन, रावलधी-दिल्ली बाईपास बूस्टिंग स्टेशन, सैनी आइस फैक्टरी और राहुल आइस फैक्टरी से लिए गए पानी के सैंपल आर्थोटोलीडाइन टेस्ट में पास पाए गए और पानी में क्लोरिन भी मिली।
- बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट में फेल आए ये सैंपल
डिप्टी सीएमओ डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट में हीरा चौक बूस्टिंग स्टेशन, सिविल अस्पताल बूस्टिंग स्टेशन, दिल्ली बाईपास बूस्टिंग स्टेशन समेत एक आइस फैक्टरी, वार्ड-20 व 21 के घर से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट असंतोषजनक पाई जा चुकी है। टेस्ट के दौरान पानी में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिले।
- पेट और चर्म रोग की बढ़ी है ओपीडी
बता दें कि मानसून सीजन के दौरान सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 1000 से बढ़कर 1200 पार पहुंच चुकी है। चर्मरोग और पेट की बीमारियों के मरीजों की संख्या भी सामान्य दिनों के मुकाबले इस समय बढ़ी हुई है।
- एक्सपर्ट व्यू : मानकों पर खरा न उतरने वाला पानी शरीर के लिए नहीं सही
डिप्टी सीएमओ डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि मानकों पर खरा न उतरने वाले पानी का सेवन करना शरीर के लिए सही नहीं है। ऐसे पानी के सेवन से मनुष्य विभिन्न बीमारियों का शिकार हो सकता है। हमें शुद्ध पानी का सेवन करना चाहिए। पानी में क्लोरिन और पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व होना बेहद जरूरी है। सप्लाई में आ रहे पानी को उबालने के बाद ठंडा करके लोग पीएं।
हर माह स्वास्थ्य विभाग बैक्ट्रोलॉजिकल और आर्थोटोलीडाइन टेस्ट के लिए शहर से पानी के सैंपल लेता है। फरवरी से जून तक 45 सैंपल लिए गए हैं। करीब 50 प्रतिशत सैंपल बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट में फेल पाए गए हैं।
-डॉ. गौरव भारद्वाज, डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी