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Charkhi Dadri News: 7 साल बाद भी 4 कमरों की नहीं लग पाई छत

Sun, 03 Aug 2025 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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गांव अचीना स्थित राजकीय स्कूल। संवाद
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फोटो: 10
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गांव अचीना स्थित राजकीय स्कूल। संवाद
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- जिले के अचीना गांव स्थित 121 साल पुराने राजकीय स्कूल में शिक्षकों के 26 फीसदी पद खाली, राज्य अवाॅर्डी शिक्षक भी तैनात
पूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास गुप्ता यहां मानहेरू से चलकर पढ़ने के लिए आते थे
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी/बौंदकलां। 121 साल पुराने गांव अचीना स्कूल के चार कमरे सात साल से बन रहे हैं। बजट के अभाव में इन कमरों की आज तक छत ही नहीं लग पाई। पुराने कमरों में 25 बच्चे भी ठीक से नहीं बैठ पा रहे हैं। 19 शिक्षकों के पद हैं, लेकिन, 14 ही तैनात हैं।यहां राज्य शिक्षक अवॉर्डी कृष्णा धवन डेढ़ साल से तैनात हैं। इस स्कूल में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बनारसीदास गुप्ता भी शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।
अचीना गांव का राजकीय स्कूल 121 साल पुराना हैं। यहां 7 साल पहले स्कूल में 4 कमरों और बरामदे का निर्माण शुरू हुआ था। लापरवाही के कारण ये अब तक अधर में हैं। राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल में राज्य शिक्षक अवाॅर्ड से सम्मानित कृष्णा धवन पिछले 18 माह से संस्कृत अध्यापिका के पद पर नियुक्त हैं। स्कूल में गणित, कंप्यूटर, बॉयो, ड्राइंग व पीटीआई के पद लंबे समय से खाली हैं। अभी पीटीआई का काम भी कृष्णा धवन ही देख रही हैं।
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दरअसल, इस स्कूल में शिक्षकों के 19 पद स्वीकृत हैं। तैनाती केवल 14 की है। इसके अलावा, स्वीपर का पद खाली होने से सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। दूसरी ओर शिक्षकों के 26 फीसदी पद खाली होने का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। फिलहाल, कमरों का निर्माण न होने से विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- वर्ष 1904 में बना प्राइमरी स्कूल 116 बाद हुआ अपग्रेड
अचीना गांव में वर्ष 1904 में प्राइमरी स्कूल की स्थापना की गई थी। 116 साल बाद वर्ष 2020 में स्कूल को 12वीं कक्षा तक अपग्रेड किया गया। ताकि, विद्यार्थियों को दूर-दराज के गांवों या शहर न जाना पड़े। स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि स्कूल में सफाई कर्मचारी की कमी काफी खल रही है। सफाई कर्मचारी नहीं होने के कारण शौचालयों की भी सफाई नहीं हो पाती है।
- बजट की कमी से अधर में निर्माण
अचीना गांव के राजकीय स्कूल में मौजूदा कमरों का आकार कम है। इससे एक कक्षा में 25 बच्चे भी ठीक से नहीं बैठ पाते हैं। इस समस्या को देखते हुए 7 साल पहले वर्ष 2018 में 4 बड़े कमरों का निर्माण शुरू किया गया था। बिडंबना यह कि निर्माण कार्य अब तक अधर में है। इसके लिए बजट की कमी है। इन कमरों और बरामदे की छत लगवाने के लिए कई बार मुख्यालय को अवगत करवाया गया है, लेकिन, नतीजा सिफर है।

- 12वीं कक्षा का परिणाम 100 तो 10वीं का 85 प्रतिशत
प्राचार्य रतन सिंह ने बताया कि फिलहाल, स्कूल में पहली से 12वीं कक्षा तक 190 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया हुआ है। उन्होंने बताया कि स्कूल का परीक्षा परिणाम हमेशा ही बेहतर रहता है। वर्ष 2023-24 में 12वीं का परिणाम 100 प्रतिशत और 10वीं कक्षा का 85 प्रतिशत दर्ज गया है।
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मुख्यमंत्री से आईजी तक पढ़े हैं स्कूल में
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल से पढ़कर जाने वाले अधिकतर विद्यार्थी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री बनारसीदास गुप्ता गांव मानहेरू से चलकर इसी स्कूल में पढ़ने आते थे। राजस्थान पुलिस में आईजी रह चुके रामफल ने भी प्राथमिक शिक्षा इसी स्कूल से ग्रहण की है।

स्कूल का रिपोर्ट कार्ड
कक्षा- पहली से 12वीं
छात्र संख्या-190
शिक्षकों के पद स्वीकृत- 19
तैनाती- 14
खाली पद-5
10वीं का परिणाम-85 प्रतिशत
12वीं का परिणाम- 100 प्रतिशत
ये हैं समस्याएं : मौजूदा कमरों का आकार छोटा है। नए का निर्माण ठंडे बस्ते में है। सफाई व्यवस्था भी खराब है।
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