चरखी दादरी। लोगों में आजकल तंबाकू और धूम्रपान का प्रचलन बढ़ रहा है लेकिन ये शौक मौत को आमंत्रण दे रहा है। जिले में हुक्का का चलन इतना बढ़ गया है कि घर, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों पर लोग हुक्का पीते देख जा सकते हैं। इसी प्रकार बीड़ी, सिगरेट और गुटखा का भी सेवन कर रहे हैं। तंबाकू का अधिक सेवन होने से जिले में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ गई हैं। जिले में इस समय कैंसर के 267 रोगी हैं और इनमें से 27.3 प्रतिशत मुंह के कैंसर से ग्रस्त हैं।
वहीं, 6.74 प्रतिशत यानी 18 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं। जिले में 81 रोगी ऐसे हैं जिनका कैंसर तीसरी और चौथी स्टेज पर पहुंचा हुआ है। जिला अस्पताल में कैंसर सेंटर नहीं होने की वजह से मरीजों को रोहतक पीजीआई या झज्जर जिला के बाढसा स्थित एम्स में रेफर किया जाता है। कैंसर नोडल अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि तंबाकू या गुटखा चबाने से मुंह के कैंसर और बीड़ी, सिगरेट और हुक्का से फेफड़े के कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर उपचार करवाना चाहिए, बाद में मौत का खतरा बढ़ सकता है।
दादरी जिले की बात करें तो वर्ष 2022 में 156 कैंसर रोगी थे। वहीं, इस समय अवधि तक जिले में 95 पुरुष और 61 महिलाएं कैंसर से ग्रस्त थी। वर्ष 2022 की बात करें तो जिले में मुंह के कैंसर के 47, फेफड़ों के कैंसर के 1, ब्रेस्ट कैंसर के 32 और सर्वाइकल कैंसर के 7 रोगी थे। वर्ष 2023 में 111 नए रोगी मिले। इनमें मुंह के कैंसर के 26, फेफड़ों के कैंसर के 13, ब्रेस्ट कैंसर के 20 और सर्वाइकल कैंसर के 11 रोगी मिले हैं। ऐसे में फिलहाल 267 कैंसर रोगी सक्रिय हैं। इनमें मुंह के कैंसर के 73, फेफड़ों के कैंसर के 23, ब्रेस्ट कैंसर के 52 और सर्वाइकल कैंसर के 18 मरीज हैं।
कैंसर पीड़ितों को मिलती है बस पास की सुविधा
प्रदेश सरकार की ओर से कैंसर रोगियों को बस पास की सुविधा दी जाती है। इसके लिए मरीजों को कैंसर रिपोर्ट तथा अपने दस्तावेज जिला अस्पताल में जमा करवाने होते हैं। उसके बाद नागरिक अस्पताल रोडवेज विभाग से पास बनवाकर देता है। इसके अलावा 30 साल ऊपर के व्यक्ति को अगर मुंह में कोई दिक्कत होती है तो डेंटल सर्जन के पास चेक करवा सकते हैं। डेंटल सर्जन उनकी जांच आगे भेज देते हैं। रिपोर्ट आने के बाद उनको सूचित कर दिया जाता है। यह सुविधा हर अस्पताल में उपलब्ध है।
मुंह के कैंसर के प्रारंभिक लक्षण
- मुंह के अंदर बार-बार छाले होना, जो दर्द नहीं करते।
- मुंह के अंदर घाव बनना।
- मुंह के अंदर गांठ बनाना
- खाना निगलने में कठिनाई होना
- बोलने में दिक्कत होना
- मुंह से बदबू आना।
फेफड़े के कैंसर के प्रारंभिक लक्षण:-
- छाती में दर्द रहना।
- अधिक समय तक खांसी रहना।
- खांसते समय खून आना।
- सांस लेने में कठिनाई महसूस करना।
- हर समय थकान महसूस करना।
- भूख नहीं लगना।
- अपने आप वजन कम होना।
जानिये...किस स्टेज में ठीक होने की क्या रहती है संभावना
स्टेज - ठीक होने की संभावना
पहली- 90 प्रतिशत
दूसरी- 60 प्रतिशत
तीसरी-10 प्रतिशत
चौथी-10 प्रतिशत
जिले में 267 कैंसर पीड़ित मरीज हैं। सर्वाधिक मरीज मुंह के कैंसर के हैं। 81 मरीज तीसरी और चौथी स्टेज पर हैं। तंबाकू का प्रयोग न करना, आहार व योग पर ध्यान देकर इससे बचाव संभव है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी कैंसर के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। -डॉ. नरेंद्र सिंह, कैंसर नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी।