संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। स्वास्थ्य विभाग शहरी केंद्रों की सेवाओं में तो सुधार कर रहा है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्थाएं पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। 25 गांवों में उपस्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन बनाने की योजना ठंडे बस्ते में है। इन केंद्रों पर तैनात स्टाफ को भय के साये में रहकर या फिर उधारी की छत के नीचे बैठकर मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है।
दादरी जिले में 79 उपस्वास्थ्य केंद्र भवन हैं। 35 से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्रों के भवन लंबे समय से जर्जर हैं। अक्तूबर 2021 में सरकार के निर्देशों पर पुराने भवनों की मौजूदा स्थिति जानने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से संपर्क किया था। उसके बाद संयुक्त टीम ने इन भवनों का निरीक्षण किया।
टीम ने 25 भवनों को जर्जर बताया था जबकि दस में मरम्मत की दरकार बताई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पीडब्ल्यूडी से तैयार करवाई गई रिपोर्ट अगली कार्रवाई के लिए सरकार के पास भेजी थी। उस दौरान कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
इसके बाद उपस्वास्थ्य केंद्र भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को दी गई। खास बात यह है कि करीब 15 उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवन बनाने के लिए निविदा आमंत्रित की गई। प्रक्रिया सिरे चढ़ने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया।
संवाददाता ने इसका कारण जानने के लिए पड़ताल की तो सामने आया कि पुराने भवन को तोड़ने के लिए बजट का पेच फंसा है। एक भवन को तोड़ने पर 8,000 रुपये खर्च आएगा। पंचायतीराज विभाग बजट स्वास्थ्य विभाग से मांग रहा है और स्वास्थ्य विभाग को मुख्यालय से बजट नहीं मिला है।