बाढड़ा। गांव काकड़ौली हट्ठी में वर्ष 2020 खरीफ सीजन में खराब हुई कपास की फसल का मुआवजा बीमा कंपनी ने जारी कर दिया है। कंपनी ने 235 किसानों के बैंक खातों में 58 लाख की राशि डाल दी है।
पिछले चार साल से कंपनी जहां मुआवजा देने से साफ इंकार कर रही है, वहीं, प्रदेश सरकार किसानों के पक्ष में थी। मुआवजा दिलवाने में सहयोग करने पर ग्रामीणों ने पूर्व वित्त मंत्री जेपी दलाल का आभार प्रकट किया है। जल्द ही गांव में अभिनंदन करने का निर्णय लिया है।
किसान बलबीर नंबरदार, देवीलाल नंबरदार, सोमबीर सिंह, महेंद्र सिंह, राजबीर, रोहताश, सीताराम, राकेश कुमार, समुंद्रपाल, जुगबीर सिंह, भूपेंद्र श्योराण, हरीकिशन, सोमबीर, राजपाल आदि ने बताया कि तत्कालीन कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल से इसे बारे में मांग की गई थी।
जेपी दलाल ने दादरी के जिला उपायुक्त को सारे मामले की जांच करवाने के लिए कहा था। इसके बाद एसडीएम शंभु राठी ने जांच की तो बीमा कंपनी का गोलमाल उजागर हुआ था।
किसानों ने बताया कि वर्ष 2020 में खरीफ सीजन में सफेद मक्खी, उखेड़ा व बारिश के कारण कपास, बाजरे की फसल खराबें की भेंट चढ़ गई थी। इस पर किसानों ने प्रदेश सरकार को अवगत करवाया था। बीमा कंपनी ने सर्वे की थी। तत्पश्चात बीमा कंपनी ने साथ लगते सभी गांवों के किसानों को तो मुआवजा वितरित करवा दिया था जबकि गांव काकड़ोली हट्ठी के किसानों को वंचित कर दिया था।
बीमा कंपनी व कृषि विभाग ने कपास का जो रकबा दिखाया, वह इस गांव से साठ किलोमीटर दूर हांसी क्षेत्र का था। बीमा कंपनी के दस्तावेज में किसानों व नंबरदारों का रिकाॅर्ड फर्जी मिला था। एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में किसानों को मुआवजा का पात्र माना था, जिस पर उपायुक्त ने भी रिपोर्ट पर सहमति जताई थी। सभी पात्र किसानों का नुकसान वाजिब बताकर मुआवजा देने की बात कही गई।
इतना लंबा समय बीतने व न्याय न मिलने से किसानों में रोष बना हुआ था। बाद में यह मामला केंद्रीय तकनीकी कमेटी को भेजा गया था। इस कमेटी ने इन किसानों को मुआवजा के लिए पात्र माना और मुआवजा जारी करने के लिए कहा। अब 235 किसानों के खातों में 58 लाख की राशि भेजी गई है।