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Charkhi Dadri News: वन विभाग रोपेगा एक दिन में दो लाख पौधे

Wed, 07 Aug 2024 05:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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बड़े स्तर पर पौधरोपण के लिए मियावाकी पद्धति से होगा पौधरोपण
जिले के 167 गांवों में मानसून सीजन छह लाख पौधरोपण का रखा गया है लक्ष्य
हरियाली
रविंद्र कुमार सैनी
चरखी दादरी। एक पेड़ मां के नाम मुहिम के तहत वन विभाग जिले में एक ही दिन में यानी 12 अगस्त को दो लाख पौधे रोपेगा। इस काम में वन विभाग सभी विभागों के साथ सामाजिक संगठनों और लोगों की मदद लेगा। वन विभाग ने इस काम के लिए पहले से ही पूरी तैयारी कर ली है। विभाग मियावाकी पद्धति से पौधरोपण करेगा।
बता दें कि जिला प्रशासन ने इस साल वन विभाग के माध्यम से करीब दो लाख पौधे तैयार किए गए हैं। ये पौधे वन विभाग की छह नर्सरियों में तैयार किए गए हैं। मानसून की पहली बारिश के साथ पौधरोपण शुरू कर दिया गया है।
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इनमें से वन विभाग 1.20 लाख पौधे ग्राम पंचायतों, सरकारी स्कूलों, समाजसेवी संस्थाओं को मुफ्त वितरित करेगा। वन विभाग के अनुसार, इन पौधों की हिसार की नर्सरी से कलम मंगवाकर तैयार किया गया है।
इन प्रजातियों की पौध की गई तैयार
वन राजिक अधिकारी हेमंत कुमार ने बताया कि विभाग की गांव रामनगर कपूरी, बरसाना, सांजरवास, बाढड़ा, बिंद्राबन एवं बडेसरा में पौधे पॉली बैग में तैयार किए गए हैं। इनमें ऑस्ट्रेलियन टीक, बेलपत्र, सफेद सीरस, नीम, सफेद कचनार, पपीता, करोंधा, कनेर, अमलतास, लेसुआ, शीशम, गुलमोहर, गुगल, जामुन, बरगद, गुलर, पीपल, गुड़हल, आम, हरसिंगार, महागनी, चांदनी, इमली, फरस, अर्जुन, बहेड़ा, गिलोय, बेर, पपड़ी, अलंथस, पिलखन, सहाजन, जावा केसिया, आंवला व कीकर आदि शामिल हैं।
मानसून का एक माह बीत चुका
प्रदेश में अब तक मानसून काफी फीका रहा है। इस कारण वन विभाग भी अपने मुहिम में तेजी नहीं ला पाया है। विभाग को जिले के सभी 167 गांवों में पौधरोपण करना है। इसके अलावा सड़कों व नहरों के किनारे भी यह कार्य किया जाना है। गांवों में खाली शामलात जमीन के अलावा सरकारी कार्यालयों व स्कूल परिसर आदि में भी पौधे लगाने जाने की योजना है। ऐसे में विभाग 12 अगस्त को बड़ी मुहिम चलाकर एक साथ दो लाख पौधे रोपेगा

यह है मियावाकी पद्धति
मियावाकी पद्धति में देसी प्रजाति के पौधे एक-दूसरे के समीप लगाए जाते हैं। ये कम स्थान घेरने के साथ ही अन्य पौधों की वृद्धि में भी सहायक होते हैं। सघनता की वजह से ये पौधे सूर्य की रोशनी को धरती पर आने से रोकते हैं। इससे धरती पर खरपतवार नहीं उग पाता है। इस पद्धति में पौधों के बीच की दूरी 1 मीटर के लगभग होती है। अमूमन पौधरोपण के दौरान दो पौधों के बीच की दूरी छह मीटर तक की रखी जाती है। इसमें पौधों की प्रजाति अलग-अलग तरह की होती है।
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वर्जन
जिले में 12 अगस्त को एक पेड़ मां के नाम मुहिम के तहत एक साथ दो लाख पौधे रोपे जाएंगे। इस काम में आम लोगों के साथ सामाजिक संगठनों का साथ लिया जाएगा। अबकी बार जिले में मानसून सीजन छह लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। कई जगहों पर पौधरोपण के लिए मियावाकी पद्धति भी अपनाई जाएगी। ताकि अधिक से अधिक पौधे रोपे जा सकें।
- हेमंत कुमार, वन राजिक अधिकारी, चरखी दादरी।

फोटो 14- लोगों को पौधे वितरित करते डीएफओ नवल किशोर। स्रोत : वन विभाग
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