संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर में सीवरेज की सफाई के लिए जनस्वास्थ्य विभाग के पास स्थायी तौर सुपर सकर मशीन ही नहीं है। शहर में 175 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन है, जो कहीं न कहीं से ब्लॉक रहती है। हालांकि ज्यादा समस्या बढ़ने पर दूसरे जिलों से मशीन उधारी मंगवाकर काम चलाना पड़ता है। इसका खर्च भी विभाग को वहन करना पड़ता है।
शहर में सीवर समस्या पिछले कई सालों से बनी हुई है। इस समय शहर में पानी की निकासी के लिए 126 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत नई लाइनें भी बिछाई गई हैं। नए पंपिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं। नई मोटर भी लगाई गई हैं। पुरानी सीवर लाइनों को ठीक भी किया गया है।
विशेषज्ञों की मानें तो सुपर सकर मशीन का काम सीवर ब्लॉकेज होने पर लाइन को साफ करना होता है। कई बार प्लास्टिक एवं अन्य कचरा सीवर लाइन में फंस जाने पर रुक जाती है, जिससे पानी आगे नहीं बढ़ पाता है। इस समय विभाग के पास छोटे स्तर की मशीन तो हैं जबकि बड़े स्तर की सुपर सकर मशीन चाहिए तब जाकर पूर्ति संभव है। बारिश सीजन में तो वैसे ही हालात खराब हो जाते हैं।
विभाग के पास दो जेटिंग मशीन हैं। एक ग्रेप मशीन है जो सीवर की सफाई करती है। एक बकेट मशीन है। इनके अलावा ट्रैक्टर आधारित मशीन व एक टैंकर है, जिनके जरिये काम चलाया जा रहा है।
तत्कालीन कृषि मंत्री का वादा आज तक अधूरा
सुपर सकर मशीन की कमी की मांग तत्कालीन कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के समक्ष भी रखी गई थी। कष्ट निवारण समिति की बैठक में ओमप्रकाश धनखड़ ने दादरी को सुपर सकर मशीन दिलाने का वादा किया था, लेकिन वो इसे अब तक पूरा नहीं करवा सके हैं। इसके अलावा राज्यमंत्री अनूप धानक के समक्ष भी कष्ट निवारण समिति की बैठक में ये मुद्दा उठाया गया था।
- मानसून सीजन में पड़ोसी जिलों से मशीन मिलना संभव नहीं
सामान्य दिनों में तो अन्य जिलों से दादरी को उधारी की सुपर सकर मशीन मिल जाती है, लेकिन मानसून सीजन के दौरान किसी दूसरे जिले से मदद मिलना पाना मुश्किल है। वहीं, अगर इस सीजन में सीवर ब्लॉकेज रही तो फिर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
शहर में सीवर ब्लॉकेज खोलने के लिए इस समय सुपर सकर मशीन की जरूरत है। इसके लिए कई बार मांग की जा चुकी है। इस समय छोटी मशीनों से काम चलाया जा रहा है।सीवर का प्रोजेक्ट पूरा होने को है। इससे मानसून सीजन में लोगों को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। बारिश के बाद कुछ ही घंटों में पानी का उठान कर दिया जाएगा। - सोहन लाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग