अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संघों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को नए श्रम कानूनों के विरोध में मजदूरों एवं कर्मचारियों ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर चारों नए श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है। प्रदर्शन में श्रमिक संगठन सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा तथा बैंक व बीमा से जुड़े कर्मचारियों ने भाग लिया।
श्रमिकों व कर्मचारियों ने कहा कि नए श्रम कानूनों को भाजपा सरकार मजदूर हितैषी दिखाने के लिए पूरा प्रचार-प्रसार कर रही है। असल में यह मजदूरों के कानूनी व बेहतर जीवन का सपना छीनने वाले साबित होंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 8 घंटे की ड्यूटी का कानून 19वीं शताब्दी में दुनिया भर में हुए संघर्षों से हासिल किया गया। जब तकनीक विकसित हो गई तो ट्रेड यूनियनों की 6 घंटे के कार्य दिवस की मांग है। ऐसे में 12 घंटे की ड्यूटी का प्रावधान आखिर किसके हित में है। कहा कि 40 मजदूरों तक के कारखाने में लेबर कानूनों से छूट प्रदान करना, सरकार की इजाजत के बिना 300 कार्यबल तक के संस्थानों में तालाबंदी, ले ऑफ की खुली छूट प्रदान करना आखिर किसे फायदा पहुंचाएगा। फिक्स टर्म की जॉब का प्रावधान न केवल स्थायी नौकरी को खत्म करेगा बल्कि सामाजिक सुरक्षा, पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी समाप्त करेगा। ठेकेदारों को लाइसेंस लेने के लिए कोई टर्म एंड कंडीशन नहीं होगी। ग्रेच्युटी का अधिकार बेमानी हो जाएगा। गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए न कोई न्यूनतम वेतन और न टाइम के घंटे निर्धारित हैं सिर्फ कागज में सामाजिक सुरक्षा लिख देना भ्रम के अलावा कुछ नहीं है।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि इन श्रम नियमों को रद्द करने, बिजली संशोधन बिल 2025 रद्द करने, परियोजना, एचकेआरएन कर्मचारियों सहित सभी कच्चे या अस्थायी कर्मियों को स्थायी करने की मांग शीघ्र पूरी जाए। उन्होंने कहा कि समान काम समान वेतन लागू हो। राज्य में न्यूनतम वेतन रिवाइज करके 26000 रुपये प्रतिमाह किया जाए पुरानी पेंशन स्कीम बहाल हो, खाली पद भरे जाएं, सरकारी विभागों में स्थायी भर्ती हो, निजीकरण की प्रक्रिया बंद की जाए। मनरेगा में 200 दिन काम और 800 रुपये मजदूरी की जाए। निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन हो और जरूरी सुविधाएं मिले। किसानों-मजदूरों के कर्जे माफ हो, एमएसपी पर फसल खरीद की गारंटी दी जाए।