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Chandigarh-Haryana News: नए श्रम कानूनों के विरोध मजदूर व कर्मचारी संगठन लामबंद

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कहा- विरोध के बावजूद लागू किया, मजदूरों को गुलाम बनाने का रास्ता साफ किया
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चंडीगढ़। नए श्रम कानूनों के विरोध में कर्मचारी व मजदूर संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। यूनियनों ने नए श्रम कानूनों के विरोध में 26 नवंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने 29 कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड्स को लागू करने का एलान किया है। केंद्र सरकार इसे बड़ी उपलब्धि बता रही है जबकि संगठन विरोध जता रहे हैं।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और मजदूर संगठन सीटू के जरनल सेक्रेटरी जयभगवान ने लेबर कोड्स को लागू करने को मजदूर वर्ग पर बड़ा हमला बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार का सह कदम पूंजीपतियों और काॅर्पोरेट सेक्टर के लिए मजदूरों को गुलाम बनाने का रास्ता साफ किया गया और 100 साल में हासिल अधिकारों को पलटा गया है। देश का मजदूर और कर्मचारी आंदोलन इस हमले का माकूल जवाब देगा और इसे वापस करवाने के लिए निर्णायक आंदोलन करेंगे।
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मजदूरों को फायदा नहीं, सभी अधिकार खत्म किए



सीटू के महासचिव जय भगवान, कोषाध्यक्ष सुखबीर सिंह व उप प्रधान सतबीर सिंह ने कहा कि इन लेबर कोड्स को इस प्रकार से प्रचारित किया जा रहा है कि जैसे देश के 40 करोड़ मजदूरों की पौ बारह हो जाएंगी जबकि यह मजदूरों के सभी अधिकार और हक को खत्म कर रहा है। फिक्स टर्म नौकरी का अर्थ है कि पक्की या स्थाई नौकरी का खात्मा, सरकार ने कच्ची/ठेके की नौकरी का स्थाई प्रबंध कर दिया है।
20 मजदूरों तक के संस्थानों को श्रम कानूनों को लागू करने से बाहर कर दिया है। इसी प्रकार 300 मजदूरों तक के संस्थानों को बिना सरकार की अनुमति के कभी भी बंद किया जा सकता है और मजदूरों की छंटनी की जा सकती है। काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे करने का प्रावधान किया गया है। यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार पर इन लेबर कोड्स में अघोषित प्रतिबंध लगाया गया है।



कई प्रावधान पहले से ही, गुमराह किया जा रहा

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि समान काम-समान वेतन का पहले से ही प्रावधान है और महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश का भी। इसे नए लेबर कोड्स में जोर-शोर से प्रसारित किया जा रहा है। जिला स्तर पर श्रम न्यायालयों को खत्म कर दिया गया है और सत्यापन का अधिकार लेबर विभाग से छीन लिया गया है।
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वहीं, गीग वर्कर्स या प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा व अन्य लाभों के बारे में भ्रम फैलाया जा रहा है। इस हिस्से के केवल जिक्र भर है कोई भी ठोस प्रावधान नहीं है। इसी प्रकार से ग्रेच्युटी का अधिकार 5 साल से घटाकर एक साल करने की बात की गई है जब नौकरी ही फिक्स टर्म है यानी हायर एंड फेयर तो ग्रेच्युटी का अधिकार ही बेमानी है। उन्होंने कहा कि देश के श्रमिक और कर्मचारी संगठन इसके विरोध में 26 नवंबर को बड़ी कार्रवाई करेंगे।
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