कांग्रेस जिला अध्यक्ष पद के लिए साक्षात्कार शुरू, पर्यवेक्षक पूछ रहे सवाल
चंडीगढ़। प्रदेश में किस नेता की लोगों के बीच में मजबूत पैठ है, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर और भाजपा के खिलाफ एंटी-इन्कमबेंसी होने के बावजूद कांग्रेस की हार की मुख्य वजह क्या-क्या है।
वर्तमान में हरियाणा कांग्रेस की स्थिति, नेताओं की सक्रियता व अभी से भविष्य में जीत का फॉर्मूला क्या होना चाहिए? कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा इस तरह के सवाल जिला अध्यक्ष बनने के इच्छुक आवेदक नेताओं से पूछे जा रहे हैं।
दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में जिला अध्यक्ष पद के लिए नेताओं के साक्षात्कार शुरू हो गए हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह जिलों के नेताओं को दिल्ली बुलाकर साक्षात्कार लिया जा रहा है।
साक्षात्कार में शामिल एक नेता ने बताया कि भाजपा को हराकर कांग्रेस को सत्ता में वापसी करवाने के लिए किन रणनीति पर काम करने की आवश्यकता है, इस पर भी उन्हें अपनी योजना विस्तार से सवाल किए जा रहे हैं। वहीं, आवेदक के भूत, भविष्य व वर्तमान राजनैतिक कैरियर सहित उनके कई पीढि़यों के बारे में सवाल-जवाब हो रहे हैं। अध्यक्षों की चुनने की प्रक्रिया काफी पारदर्शी और मजबूत है।
राहुल गांधी के निर्देशानुसार छह-छह नामों का पैनल तैयार करने में लगे हैं। वहीं, शहरी के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सहयोगी नेता या उपाध्यक्ष की नियुक्ति संभावित मानी जा रही है।
इसके लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं ने अलग से योजना बना रखी है। ताकि जिलों से लेकर ब्लाक व ग्रामीण स्तर पर भी कांग्रेस की मजबूत पकड़ तैयार की जा सके।
आरएसएस व भाजपा संगठन की कार्यशैली को मात देने पर क्या फार्मूला होगा
नूंह जिले से साक्षात्कार में शामिल होने वाले एक नेता ने बताया कि भाजपा को जीत दिलाने वाली आरएसएस की कार्यशैली को मात देने की दिशा में किस तरह मजबूत योजना से काम करेंगे, यह सवाल भी पूछा जा रहा है। किसी आवेदक को जिला अध्यक्ष बनने के बाद चुनाव में उनके जिले की जिम्मेदारी सौंपने पर उनका जीत का क्या फार्मूला होगा? इसी तरह केंद्रीय पर्यवेक्षक नेताओं की राजनैतिक समझ, आईक्यू लेवल, गुटबाजी के दूरी या प्रेम रखने का पता भी लगा रहे हैं।