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Chandigarh-Haryana News: प्रदेश की पांच जेलों में शुरू हुए वोकेशनल व आईटीआई कोर्स

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-बंदियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम, एचकेआरएन के साथ जेल विभाग का एमओयू साइन
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा की जेलों में सुधार और पुनर्वास को नया आयाम देने की बड़ी पहल शुरू हो गई है। प्रदेश की पांच प्रमुख जेलों में से गुरुग्राम, अंबाला, करनाल, पानीपत और फरीदाबाद में अब बंदियों को आईटीआई और वोकेशनल ट्रेनिंग की औपचारिक शिक्षा मिलेगी। इसके लिए जेल विभाग और हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के बीच एमओयू साइन किया गया है। इस पर जेल विभाग के चीफ प्रोबेशन ऑफिसर विशाल सिंह और एचकेआरएन की जीएम अंबिका पटियाल ने हस्ताक्षर किए हैं। सभी आवश्यक उपकरण व प्रशिक्षण सामग्री जेलों में पहुंचा दी गई है और कक्षाओं की शुरुआत हो चुकी है।


राज्य की जेलों में अब शिक्षा का माहौल तेजी से विकसित हो रहा है। इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, क्योंकि दस वर्षों की तुलना में केवल इस साल ही उतने बंदी और कैदी पढ़ाई के लिए नामांकित हुए हैं जितने पहले पूरे दशक में हुए थे। जेल महानिदेशक आलोक राय ने बताया कि वर्तमान वर्ष में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल के तहत 10वीं में 550 बंदी, 12वीं में 377 बंदी और वेल्डिंग कोर्स में 20 बंदी नामांकित हुए हैं। वहीं इग्नू के माध्यम से ग्रेजुएशन के लिए 704, पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 16 और सर्टिफिकेट कोर्स के लिए 134 बंदियों ने नामांकन कराया है। इनकी परीक्षाएं इसी माह आयोजित की जानी प्रस्तावित हैं।
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14 साल में 1900 से अधिक बंदियों ने पास की परीक्षा
जेल महानिदेशक ने बताया कि पिछले 14 वर्षों में 1138 बंदियों ने 10वीं, 771 ने 12वीं कक्षा पास की है, जबकि 20 बंदियों ने व्यवसायिक कोर्स पूरे किए हैं। इस निरंतर प्रयास के परिणामस्वरूप इस वर्ष नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
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अंगूठा लगाकर आने वाला साइन करके जाएं
डीजी जेल आलोक राय ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि जो बंदी जेल में अंगूठा लगाकर आते हैं, वे शिक्षा प्राप्त कर हस्ताक्षर करके बाहर जाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से बंदियों को सुधार का दूसरा अवसर दिया जा रहा है। साक्षरता न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी बल्कि जेलों में अनुशासन और शांति बनाए रखने में भी सहायक होगी। शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से बंदियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति को रोकने में भी सहायक सिद्ध होगी।
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