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Chandigarh-Haryana News: खेतों में साफ दिखी आफत, फाइलों में अटकी राहत

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दो माह में धान खरीद की प्रक्रिया पूरी पर तीन माह में खराब फसलों की गिरदावरी नहीं हो पाई
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रेवाड़ी में 471.60 एकड़ में गिरदावरी शेष, उसके बाद कई अधिकारियों के स्तर पर होना है सत्यापन

बड़ा सवाल : किसानों को कब मिलेगा मुआवजे का पैसा? पड़ोसी राज्य 20 दिन पहले ही दे चुका



अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। हरियाणा में इस बार धान खरीद का काम रिकॉर्ड गति से पूरा हुआ। 22 सितंबर से शुरू हुई खरीद 15 नवंबर को खत्म हो गई। सरकार ने तय लक्ष्य से आठ लाख मीट्रिक टन अधिक धान खरीद भी लिया...लेकिन जब बात बारिश से तबाह हुई फसलों के मुआवजे की आती है तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है।

जुलाई और अगस्त में भारी बारिश ने हजारों किसानों की धान की फसल खराब कर दी लेकिन नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी का काम आज तक पूरा नहीं हो पाया। पटवारियों की मांग पर राज्य सरकार ने गिरदावरी की तारीख बढ़ाई पर चार महीने बीतने के बाद अभी तक काम सर्वे स्तर पर ही अटका है।
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चार महीनों में खेत पूरी तरह साफ हो चुके हैं। बारिश का पानी निकल चुका है। इसके बावजूद किसानों को मिलने वाली राहत की फाइलें अटकी हैं और मुआवजा जारी नहीं हो रहा।

विभाग का दावा है कि रेवाड़ी को छोड़ अन्य सभी 21 जिलों में गिरदावरी पूरी हो चुकी है। रेवाड़ी में 475.66 एकड़ का सर्वे चल रहा है। गिरदावरी के बाद सत्यापन होना है। कानूनगो स्तर पर 1688.07 एकड़, तहसीलदारों के स्तर पर 1272.97 एकड़ और एसडीएम स्तर पर 56 हजार 389.77 एकड़ फसल का सत्यापन शेष है। इसी तरह से मंडलायुक्त स्तर पर 8737.01 एकड़ क्षेत्र के सत्यापन का कार्य लंबित है।

किसानों की मांग पर सरकार ने अगस्त में क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला था। पोर्टल पर 6395 गांवों के 5 लाख 29 हजार 214 किसानों ने नुकसान का ब्योरा दर्ज कराया था। उनके अनुसार कुल 31 लाख 879.400 एकड़ क्षेत्र में फसल को नुकसान हुआ। उसके बाद पटवारियों के माध्यम से विशेष गिरदावरी का कार्य शुरू हुआ।

यह स्थिति तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी अक्तूबर में दावा किया था कि मुआवजे की रकम दिवाली से पहले किसानों के खाते में आ जाएगी। उस दावे के एक महीने बाद भी किसान मुआवजे के इंतजार में हैं।

इसी बीच पड़ोसी राज्य पंजाब ने तेजी दिखाई। वहां बारिश से नुकसान ज्यादा था फिर भी प्रशासन ने सर्वे समय पर पूरा कर किसानों को करीब 20 दिन पहले ही मुआवजा देना शुरू कर दिया। हरियाणा में प्रशासन की लेटलतीफी सवालों के घेरे में है। किसानों का कहना है कि खरीद में चौकसी और मुआवजे में ढिलाई समझ से परे है। खेतों में नुकसान साफ दिख रहा है लेकिन फाइलों में राहत अटकी हुई है।

एसोसिएशन का तर्क- कुछ जिलों में जलभराव के कारण हुई देरी

दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूगो एसोसिएशन हरियाणा के राज्य प्रधान जयबीर चहल ने बताया कि हमने सरकार से 15 दिनों की मोहलत मांगी थी। करीब 4000 हजार पटवारियों ने गिरदावरी का कार्य शुरू कर दिया था। रोहतक, भिवानी, फरीदाबाद, सिरसा जिलों के खेतों में अधिक पानी भरा होने के कारण यहां कार्य करने में देरी हुई थी।

विभाग का दावा-काम लगभग पूरा

हरियाणा भूमि रिकाॅर्ड विभाग निदेशालय के महानिदेशक डाॅ. यशपाल ने कहा कि गिरदावरी का कार्य लगभग पूरा हो गया है। जल्द ही सत्यापन का कार्य भी पूरा कराया जाएगा।निदेशालय ने सत्यापन का कार्य भी इसी सप्ताह के अंदर पूरा करने के आदेश दिए हैं। सत्यापन का कार्य पूरा होते ही अगले सप्ताह सरकार को पूरे ब्योरे की रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद सरकार की घोषणा के अनुसार मुआवजा देने की आगामी कार्रवाई होगी।
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मुआवजे के लिए किसान 19 को करेंगे राज्यव्यापी प्रदर्शन

अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर ने बताया कि सरकारी खरीद का कार्य पूरा हो गया लेकिन अभी तक न गिरदावरी का कार्य पूरा हुआ और न हीं किसानों को नुकसान का मुआवजा मिला। प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर ने बताया कि किसान सभा प्रदेशभर में 19 नवंबर को राज्यव्यापी आंदोलन करके नुकसान के मुआवजे की मांग करेगी। भारतीय किसान यूनियन प्रदेश अध्यक्ष रतन मान का आरोप है कि धान खरीद के दाैरान खूब फर्जी तरीके से गेटपास काटे गए, यदि गिरदावरी हो जाएगी तो असली-नकली के आंकड़े सामने होंगे। इसी गड़बड़ी को छिपाने के लिए अभी तक किसानों को तंग किया जा रहा है।
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