अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आतंकवाद के नए खतरों से नई तकनीकी और नई रणनीति के साथ निपटने के लिए उत्तरी राज्यों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और चंडीगढ़ (केंद्र शासित) ने संयुक्त मंथन किया। शुक्रवार को पंचकूला में देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और संबंधित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक के दाैरान उत्तर भारत में उभरते आतंकी खतरों और संगठित अपराध की चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति, सुरक्षा तंत्र, आपसी तालमेल को लेकर मंथन हुआ।
एनआईए के महानिदेशक सदानंद दाते ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद का बुनियादी ढांचा निरंतर बदल रहा है। डिजिटल माध्यमों और नई तकनीकों के प्रयोग से आतंकियों की रणनीति भी पहले से कहीं अधिक जटिल हो गई है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को अपनी कार्यप्रणाली को समयानुसार अपग्रेड करना होगा। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बैठक में राज्यस्तरीय तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 53 स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स (स्वाट) टीमें तैनात हैं जो किसी भी हिंसक या उग्र स्थिति में तुरंत कार्रवाई करती हैं। बैठक के दाैरान मीडिया से अनुरोध किया कि अपराधियों के महिमा मंडन से बचा जाए क्योंकि युवा इस तरह की गतिविधियों से प्रभावित होते हैं। इस बीच एकजुट होकर आतंक व अपराध पर कड़ा और बड़ा प्रहार करने का साझा संकल्प लिया। इसके साथ ही खुफिया सूचनाएं भी आपस में साझा करने में सहयोग करने की बात कही।
एनएसजी के प्रशिक्षण मॉडल और संयुक्त अभ्यास पर जोर
एनएसजी के महानिदेशक बी श्रीनिवासन ने संयुक्त आतंकवाद विरोधी प्रतिक्रिया विषय पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि अभी तक के प्रशिक्षण शिविरों में हरियाणा में 609, हिमाचल प्रदेश में 560 और चंडीगढ़ में 261 कर्मियों को बम निरोधक तकनीक, तकनीकी ड्राइविंग, कस्टमाइज्ड काउंटर टेरर कैप्सूल, फर्स्ट रिस्पॉन्डर ट्रेनिंग और राष्ट्रीय स्तर के संयुक्त अभ्यासों में प्रशिक्षित किया जा चुका है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव, चंडीगढ़ (यूटी) के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, हिमाचल प्रदेश के एडीजीपी ज्ञानेश्वर सिंह ने भी अपने राज्यों में कराए गए कार्यों की रणनीति व अनुभव साझा किए। इसके अलावा एनआईए के आईजी विजय साखरे, हरियाणा सीआईडी के आईजी मनीष चौधरी, एसटीएफ हरियाणा के आईजी सतीश बालन, सिमरदीप सिंह ने भी अनुभव साझा किए।