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Chandigarh-Haryana News: आठ महीने में तीन निदेशक...लटक रहे काम, योजनाएं पड़ रहीं धीमी

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-परिवहन विभाग में निदेशकों की अस्थिरता से बसों की ट्रैकिंग, ऑनलाइन टिकट बुकिंग से लेकर बजट के काम अटके
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अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य परिवहन विभाग में निदेशक लंबे समय तक नहीं टिक पा रहे हैं। इस कारण विभागीय कार्य लगातार लटक रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष की योजनाएं अभी तक अधूरी हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष की योजनाओं की गति भी धीमी है। रेलवे की तर्ज पर बसों की निगरानी का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। यात्रियों के लिए एकीकृत भुगतान इंटरफेस का मामला भी आगे नहीं बढ़ा है।
बीते वर्ष अक्टूबर में महानिदेशक सुजान सिंह सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद प्रदीप कुमार आए। इस वर्ष अप्रैल में बैंक घोटाले में नाम आने पर प्रदीप कुमार के निलंबन से पद फिर रिक्त हो गया। आयुक्त अतुल कुमार को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली। 26 मई को वीरेंद्र कुमार दहिया को निदेशक बनाया गया। उन्होंने पदभार संभाला है पर फिलहाल वह अवकाश पर हैं। वह अगले सप्ताह लौटेंगे। अधिकारियों की यही अस्थिरता योजनाओं की प्रगति को बाधित कर रही है। हरियाणा परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजाशेखर वुंडरू जुलाई में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
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प्रमुख योजनाओं की धीमी गति

वित्त वर्ष 2026-2027 के बजट में कई घोषणाएं हुई थीं। इनमें हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाना शामिल है। 12 शहरों में शहरी बसों का संचालन भी प्रस्तावित है। 1000 नई बसों की खरीद का कार्य भी धीमा चल रहा है। नियमित निदेशक होने पर ही इन योजनाओं में तेजी आ सकती है।
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मंत्री विज बोले-निदेशक बदलने से हो रही देरी
परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि जनता की सुविधा के लिए दो योजनाओं पर काम कराया जा रहा है। रोडवेज की बसों की रेलवे की तर्ज पर ट्रैकिंग हो या फिर यूपीआई के माध्यम से यात्रियों के किराये के भुगतान की योजना, इन दोनों को वह प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराना चाहते हैं। इसके लिए डैमो भी देख लिया है मगर निदेशक बदलने से योजना में देरी हो रही है।
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