पिछले साल शुरू के सात महीने के 899 मुकाबले इस साल 907 पहुंचा लिंगानुपात
16 जिलों में लिंगानुपात में सुधार, अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, करनाल, पलवल और सिरसा में लिंगानुपात हुई कमी
चिंताजनक : सरकार ने एचसीएस अधिकारियों को दी अतिरिक्त जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जन्म के समय लिंगानुपात को बढ़ाने की स्वास्थ्य विभाग कोशिशें रंग लाने लगी हैं। इस वर्ष सात महीने यानी एक जनवरी से 31 जुलाई तक राज्य का लिंगानुपात 907 पहुंच गया है जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 899 था लेकिन छह जिलों के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है। अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, करनाल, पलवल और सिरसा में लिंगानुपात में पिछले साल इसी अवधि के दौरान गिरावट दर्ज की गई है। ये सभी जिले पड़ोसी राज्यों से सटे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब इन जिलों में फोकस बढ़ा दिया है। करनाल के अलावा बाकी जिलों की निगरानी के लिए पांच एचसीएस अधिकारियों की जिम्मेदारी लगाई गई है। ये अधिकारी लिंगानुपात से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी करेंगे और सरकार को रिपोर्ट करेंगे।
हरियाणा 2024 में राज्य वार्षिक जन्म दर प्रति हजार पुरुषों पर 910 लड़कियों का आ गया था जो आठ साल में सबसे कम था। हालांकि 2019 में 923 अंक तक लिंगानुपात पहुंच गया था। गिरते लिंगानुपात को सरकार ने गंभीरता से लिया और पूरे राज्य में एक व्यापक अभियान चलाया। इससे राज्य के 16 जिलों में लिंगानुपात बढ़ा लेकिन छह जिलों में लिंगानुपात पिछले साल की तुलना में कम हो गया है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, लिंगानुपात में उतार-चढ़ाव चलता रहता है। यह एक अनुमानित डाटा होता है। असल में इसका पता साल के अंत में लगेगा। अभी पांच महीने रहते हैं। विभाग की ओर से काफी सख्ती से काम किया जा रहा है। अंबाला में पिछले वर्ष जुलाई 2024 में लिंगानुपात 907 था, जो घटकर 886 रह गया। वहीं, भिवानी में 927 से 909, चरखी दादरी में 886 से 854, करनाल में 947 से 912, पलवल में 917 से 885, सिरसा में 955 से 927 हो गया है।
इन सभी जिलों की सीमाएं दूसरे जिलों से मिलती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि यदि दूसरी राज्यों से जुड़े होने की वजह से लिंगानुपात में गिरावट आ रही है तो यह तर्क सही नहीं है। यदि ऐसा होता तो पानीपत, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र और फरीदाबाद में भी लिंगानुपात गिरता लेकिन ऐसा नहीं है। इसके पीछे एक कारण यह हो सकता है कि अधिकारियों का फोकस पीएनडीटी के क्षेत्र में कम हो गया हो। जाहिर है कि पलवल की सीमा यूपी, सिरसा की पंजाब से, करनाल की यूपी से, चरखीदादरी व भिवानी की राजस्थान और अंबाला की पंजाब से मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय बनाने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने लिंगानुपात के क्षेत्र में निराशाजनक प्रदर्शन करने वाले अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल और सिरसा के सिविल सर्जन से पीएनडीटी एक्ट के तहत दी गई शक्तियां वापस ले ली हैं। करनाल में फिलहाल कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल के निर्देश पर पांच एचसीएस अधिकारी विजय, शिल्पी, अंकिता, भूपेंद्र और कुलधीर को इन पांचों जिलों में निगरानी बढ़ाने और उसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपने के निर्देश दिए हैं। एसीएस के मुताबिक इन जिलों में सख्ती और निगरानी बढ़ाई गई है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि अवैध गर्भपात किसी भी कीमत पर न हो सके।