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Chandigarh-Haryana News: टीबी के खिलाफ जंग तेज, छह महीने में खोज निकाले 45 हजार नए मरीज

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फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, रोहतक और पानीपत में ज्यादा मरीज
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स्वास्थ्य विभाग ने हरियाणा को 2025 तक टीबी मुक्त करने का रखा लक्ष्य



आशीष वर्मा

चंडीगढ़। भारत समेत हरियाणा को दिसंबर 2025 तक टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में टीबी मरीजों की पहचान के लिए गहन जांच अभियान छेड़ा हुआ है। राज्य के कोने-कोने में कैंप लगाकर मरीजों की पहचान की जा रही है। जनवरी से लेकर 24 जून तक 45 हजार 586 नए मरीजों की पहचान की जा चुकी है। इन मरीजों की जांच के लिए करीब चार लाख 40 हजार टेस्ट किए गए हैं। इन मरीजों की पहचान का मकसद सिर्फ यही है कि टीबी को नियंत्रित किया जा सके।
राज्य टीबी अधिकारी डॉ. राजेश राजू ने बताया, टीबी रोकने के लिए समय पर मरीज की पहचान कर उसका इलाज करा दिया जाए। एक टीबी मरीज कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। यदि यह अभियान नहीं चलाया जाता तो इतनी संख्या में मरीज सामने नहीं आते। उन्होंने बताया- अभियान की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टीबी मरीजों की जांच सुबह, शाम और रात में की जा रही है। हालांकि, अभियान के सामने अभी भी कई बाधाएं हैं। सबसे बड़ी दिक्कत लोगों में टीबी के प्रति जागरूकता कम है। दो हफ्ते लगातार खांसी को लोग सामान्य मानते हैं, जबकि यही सबसे सामान्य लक्षण है। बलगम जांच कराने को लेकर लोगों में अब भी हिचकिचाहट है।
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एचआईवी, डायबिटीज पीड़ितों पर रिस्क फैक्टर ज्यादा

टीबी की जांच के लिए उन मरीजों पर फोकस किया जा रहा है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है। इनमें एचआईवी/एड्स, मधुमेह, या कुपोषण से पीड़ित लोग शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग उन इलाकों में भी जांच कर रहा है, जहां घनी आबादी है और स्वच्छता में कमी है। यहां रहने वाले लोगों में भी टीबी होने का खतरा रहता है। इन इलाकों में ज्यादा से ज्यादा कैंप लगाए जा रहे हैं।
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टीबी मरीज के मेंटर्स बनेंगे एनसीसी व एनएसएस

टीबी मरीजों का हौसला बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एनसीसी व एनएसएस कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बना रहा है। ये कार्यकर्ता मरीज से मुलाकात करेंगे। उसका हाल-चाल पूछेंगे और उसका हौसला बढ़ाएंगे। टीबी अधिकारी डॉ. राजेश राजू का कहना है कि टीबी होने के बाद कई मरीज का मनोबल गिर जाता है। इससे वे मानसिक तनाव में आते हैं और इलाज भी प्रभावित होता है। यदि उनका हौसला बढ़ता रहे। उन्हें भी लगे लोग उनके साथ हैं तो वह इस बीमारी से जल्द मुक्ति पा सकते हैं। प्रदेश के सभी एनसीसी, एनएसएस व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को टीबी अभियान के साथ जोड़ा जा रहा है और सबके जिम्मे एक-एक मरीज की जिम्मेदारी दी जाएगी।





कहां कितने मरीज

जिला मरीज
अंबाला 1598
भिवानी 1574
चरखी दादरी 463
फरीदाबाद 5334
फतेहाबाद 1084
गुरुग्राम 5559
हिसार 3136
झज्जर 1159
जींद 1327
कैथल 1174
करनाल 2675
कुरुक्षेत्र 1232
महेंद्रगढ़ 1012
मेवात 2499
पलवल 1361
पंचकूला 1194
पानीपत 2910
रेवाड़ी 1467
रोहतक 3006
सिरसा 1559
सोनीपत 2666
यमुनानगर 1597
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