-शिक्षक से चरित्र निर्माण की होती है अपेक्षा, बच्चे और उसे परिजनों का भरोसा तोड़ा : हाईकोर्ट
-खेल प्रतियोगिता के दौरान कैंप में बच्चे से लगातार कुकर्म करने का था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 7वीं कक्षा के नाबालिग छात्र से कुकर्म करने के दोषी शिक्षक की सजा को बरकरार रखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शिक्षक की अपील को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची शिक्षक के रूप में मार्गदर्शक था और उस पर पढ़ाने, चरित्र और व्यक्तित्व के निर्माण में मदद की उम्मीद थी, पर उसने छात्र और उसके परिजनों का भरोसा तोड़ दिया। गुरु-शिष्य का पवित्र रिश्ते को तार-तार किया है, इसलिए कोई राहत नहीं दी जा सकती।
याचिका दाखिल करते हुए रेवाड़ी निवासी नितिन ने बताया कि वह एक निजी स्कूल में शिक्षक था। 7 नवंबर 2017 को यमुनानगर के रादौर में नेशनल जिम्नास्टिक मीट का आयोजन हुआ था जो 12 नवंबर तक चली थी। याची स्कूल से बच्चों के दल को लेकर वहां गया था। शिकायत के अनुसार याची ने रादौर में लगातार 7 से 12 दिसंबर तक उनके बच्चे के साथ कुकर्म किया और किसी को न बताने की धमकी दी। बच्चा उदास रहने लगा तो बच्चे की मां ने कारण पूछा तो बच्चे ने घटना का खुलासा किया। शिकायत के आधार पर रेवाड़ी पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर ली। 8 दिसंबर को यमुनानगर में इस घटना काे लेकर एफआईआर दर्ज की गई। जिला अदालत ने याची को दोषी मानकर 12 साल कैद व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। इस आदेश को चुनौती देते हुए याची ने कहा कि वह रादौर में बच्चों के समूह के साथ एक हाल में रहे थे। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट में कुकर्म की पुष्टि नहीं हुई और एफआईआर में भी देरी हुई है। याची ने कहा कि बच्चा अच्छी रैंक नहीं ला सका इसका बदला लेने के लिए एफआईआर दर्ज करवाई गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि छोटे बच्चे का इस प्रकार की घटना के बाद डर जाना कोई अनोखी बात नहीं है, जो देरी का कारण बना। किसी का बच्चा अच्छी रैंक नहीं ला सका इसकी दुश्मनी शिक्षक से निकालने के लिए कभी भी कोई बाप अपने बच्चे को इतना बड़ा आघात नहीं देगा। कोर्ट ने याची की सभी दलीलों राहत के लिए नाकाफी मानते हुए अपील खारिज कर दी।