-कोर्ट ने पूछा-क्यों न अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए
-जांच में शामिल करने के स्थान पर जमानत के आदेश की प्रति लाने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आरोपी को जांच में शामिल होने की अनुमति देने के बजाय अदालत के जमानत आदेश की सत्यापित प्रति लाने का निर्देश देने के कैथल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के व्यवहार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निंदनीय करार दिया है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि संबंधित अधिकारी का यह आचरण न्यायालय की अवमानना, विशेषकर आपराधिक अवमानना करने का प्रयास प्रतीत होता है। उन्होंने पूछा कि क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। न्यायालय ने आदेश दिया कि डीएसपी कैथल 26 मई से पहले इस संदर्भ में स्पष्टीकरण दाखिल करें।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार आरोपी को जमानत इस शर्त के साथ दी गई थी कि वह एक सप्ताह के भीतर जांच में सम्मिलित होगा। आरोपी ने अदालत के आदेश का पालन करते हुए 5 अप्रैल को डीएसपी कैथल के समक्ष पेश होकर जांच में शामिल होने की इच्छा प्रकट की लेकिन डीएसपी ने उसे जांच में शामिल करने के बजाय यह कहकर वापस भेज दिया कि वह पहले अदालत के आदेश की सत्यापित प्रति लाकर दे। अपीलकर्ता के वकील ने न्यायालय को बताया कि इस व्यवहार के कारण आरोपी को एक अन्य प्राथमिकी में गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि यह दूसरा मामला कुरुक्षेत्र के कृष्णा गेट थाना में दर्ज था, जिसमें आरोपी को समय न देकर सीधे हिरासत में ले लिया गया।
जस्टिस मौदगिल की पीठ के समक्ष यह भी बताया गया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दाखिल अपने उत्तर में स्वयं डीएसपी ने यह स्वीकार किया कि आरोपी अपनी मां और चाचा के साथ जांच में शामिल होने उनके कार्यालय आया था, लेकिन उसे मौखिक रूप से यह कहकर लौटा दिया गया कि पहले जमानत आदेश की सत्यापित प्रति लेकर आए। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए डीएसपी कैथल को निर्देश दिया है कि वे इस आचरण पर अपना जवाब दाखिल करें और यह स्पष्ट करें कि क्यों न उनके विरुद्ध अदालत की अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की जाए।