अभी तक 69.95 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक, इनमें 69.88 एलएमटी गेहूं की बिक्री
चंडीगढ़। प्रदेश के 18 जिलों में बारिश के कारण मंडियों में गेहूं और सरसों भीगने की सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और मंडी बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है। मंडी बोर्ड ने संबंधित सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को विस्तृत जानकारी भेजने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं, बारिश से भीगे अनाज को हुए नुकसान की पुष्टि होने पर इसके पीछे जिम्मेदार के खिलाफ एक्शन भी लेने के निर्देश दिए है। इसकी पूरी एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
मंडी बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी जिलों में नियुक्त मंडी सचिव से रिपोर्ट मांगी गई है। अभी तक सचिवों का कहना है कि वह बारिश से हुए नुकसान का आंकलन कर रहे हैं, जिनकी भी लापरवाही मिलती है, उनके खिलाफ एचएपीएम एक्ट 1961 व लाइसेंस धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी 11 अप्रैल को प्रदेश में बारिश के कारण सिरसा के नाथुसरी चोपटा मंडी में अनाज भीगने पर चार आढ़तियों की लापरवाही मिली थी। इन आढ़तियों के खिलाफ संबंधित जिले के सचिवों की ओर से एचएपीएम एक्ट के तहत 3-3 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
56 एलएमटी गेहूं की हुई उठान
प्रदेशभर की 417 मंडियों में अभी तक 69.95 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं की आवक हो चुकी है। इनमें 69.88 एलएमटी गेहूं की बिक्री हुई है, जबकि इनमें से 56 एलएमटी गेहूं की उठान हो चुकी है। वहीं, प्रदेश के 4,32,310 किसानों को 12.75 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
बारिश में व्यवस्था पर सवाल
गेहूं खरीद से पहले मंडी बोर्ड की तरफ से मंडियों में अनाज के भंडारण, सुरक्षा, रखरखाव सहित अन्य बिंदुओं पर जांच की गई थी। इसके बावजूद बारिश के समय अनाज की सुरक्षा को लेकर पोल खुल गई। मंडी बोर्ड के एक अधिकारी के मुताबिक मंडियों में खरीद कंपनियां और आढ़तियों की तरफ से सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। इसकी पहले से दोनों विभाग को इंतजाम की जानकारी देते हैं, जिसकी पड़ताल भी होती है। इसके बावजूद किसी तरह की लापरवाही मिलने पर बोर्ड की तरफ से कंपनियों और आढ़तियों पर कार्रवाई भी की जाती है।