चंडीगढ़। सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता (हरियाणा संशोधन) विधेयक-2022 को सदन में एक सरकारी संकल्प (ऑफिसियल रेसोलुशन) माध्यम से वापस ले लिया। तीन वर्ष पहले अगस्त 2022 में तत्कालीन गृह मंत्री अनिल विज ने सदन में यह दंड प्रक्रिया संहिता (हरियाणा संशोधन) विधेयक-2022 को पेश किया था। यह कानून देश में लागू दंड प्रक्रिया संहिता-1973 की धारा-306 (4)(बी) जो कि किसी अपराध में संलिप्त सह-अपराधी के क्षमा दान प्राप्त साक्षी (सरकारी गवाह) से संबंधित था। हरियाणा के संबंध में संशोधन करने के लिए उक्त संशाधन विधेयक पारित किया गया था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और कानूनी विश्लेषक हेमंत कुमार के अनुसार, सरल शब्दों में इसका अर्थ यह था कि अगर किसी अपराध में संलिप्त सह-अपराधी अदालत से क्षमादान देने की शर्त पर मुख्य अपराधी व अन्य के विरुद्ध सरकारी गवाह बनने को तैयार होता है और वह जमानत पर नहीं बल्कि जेल में हो तो उक्त कानूनी संशोधन के माध्यम से उसे संबंधित अदालत जमानत पर भी रिहा कर सकती है।