कहा-पहले भी सामाजिक-आर्थिक आधार पर नौकरी की अपील सुप्रीप कोर्ट में हो चुकी खारिज
युवा अब सरकारी नौकरी की आस छोड़ दें, भाजपा मस्त, भविष्य पस्त
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में मनोहर लाल और नायब सैनी सरकारों ने हरियाणा के युवाओं के भविष्य की भ्रूण हत्या कर दी है। सामाजिक आर्थिक आधार पर अपील करने वाले सुकृति मलिक के केस को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। फिर पूरे मामले को मुख्यमंत्री नायाब सैनी दोबारा सुप्रीम कोर्ट में उलझाकर युवाओं का शोषण करने की बात क्यों कर रहे हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन में प्रेसवार्ता करते हुए भाजपा सरकार पर हमला बोला है।
सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने 11 जून, 2019 को सामाजिक-आर्थिक आधार पर नौकरी में 10 नंबर देने का झांसा देकर नीति बनाकर खूब वाहवाही लूटी और युवाओं को मेरिट पर नौकरी देने का झूठ बोलकर साल 2019 और 2024 में सत्ता हासिल कर ली। ग्रुप सी व ग्रुप डी की पारदर्शी भर्तियों के लिए एक साल में दो बार कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) कराने का दावा भी फेल हो गया।
सुरजेवाला ने कहा कि कोर्ट ने सामाजिक-आर्थिक आधार पर नंबर देने की नीति असंवैधानिक ठहराकर खारिज कर दी गई है। इस फैसले के 48 घंटे बाद भी सीएम कर्मचारियों को आश्वासन तक नहीं दे पा रहे हैं। सुरजेवाला ने कहा कि नायब सैनी इस प्रक्रिया में हटने वाले सभी हजारों कर्मचारियों के लिए नई पोस्टें गठन कर दें तो सबकी पक्की नौकरी बची रहे। उन्होंने सवाल पूछे कि 30 हजार युवाओं की नौकरी जाने पर भाजपा सरकार के पास इसका क्या हल है? नौकरी जाने के बाद इन्हें कच्चे कर्मचारी माना जाएगा? क्या अब अगले कुछ सालों तक नई सरकारी नौकरियां लग पाएंगी?