सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को 15 अप्रैल तक पाठ्य पुस्तकें मिल जाएंगी। वहीं, प्राइवेट विद्यालयों के छात्र किसी भी दुकान से अपनी पुस्तक खरीद सकते हैं। छात्र किसी एक बुक शॉप से पुस्तक खरीदने के लिए बाध्य नहीं हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह आदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन को लेकर स्कूल, तकनीकी और उच्चतर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान दिया।
मुख्यमंत्री सैनी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा- बजट भाषण में शिक्षा से संबंधित सभी घोषणाओं पर तेज गति से काम करना होगा। उल्लेखनीय है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को अभी तक पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर बोर्ड कक्षाओं के पिछले 10 वर्षो के प्रश्न पत्र व मॉक टेस्ट अपलोड किया जाएं, ताकि विद्यार्थी प्रश्न पत्रों का अध्ययन करके उसका लाभ उठा सकें। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बोर्ड की कक्षाओं के प्रश्न पत्रों में आवश्यक बदलाव करने के लिए कमेटी का भी गठन किया जाए।
उन्होंने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रदेश में इस वर्ष पूर्ण रूप से लागू किया जाए। अगर विद्यार्थी और शिक्षक अच्छा कार्य करेंगे तो उन्हें प्रोत्साहित भी किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के विद्यार्थियों में गणितीय सोच को बढ़ावा देने के लिए 10वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए हरियाणा मैथ ओलंपियाड आयोजित करने व छठी से 12वीं कक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को इसरो, डीआरडीओ व भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसे तकनीकी संस्थानों का भ्रमण करवाने के लिए जल्द ही एक रूप रेखा को तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने उच्चतर शिक्षण संस्थानों की ट्रैकिंग के लिए पोर्टल बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के हर जिले में एक राजकीय महाविद्यालय को मॉडल संस्कृति महाविद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए हर जिले में एक महाविद्यालय का चयन कर लिया गया है।
खेल व स्वच्छता विषयों पर अलग से कक्षाएं शुरू करने के आदेश
मुख्यमंत्री ने कहा- खेल व स्वच्छता विषयों पर अलग से कक्षाएं शुरू की जाए और विद्यालय स्तर पर स्वच्छता का कार्य किया जाए। शिक्षण संस्थानों में साफ-सफाई, हरियाली, रंग-रोगन, स्लोगन का विशेष ध्यान दिया जाए। आरटीई के तहत किसी भी स्कूल और उच्चतर शिक्षा के किसी भी संस्थान में कोई भी सीट खाली नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने प्रथम व द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को हर महीने एक दिन किसी न किसी राजकीय विद्यालय में जाकर समय लगाना अनिवार्य किया है और इसका एक प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।