इस बार पराली से अधिक कचरे से लेकर गैर कृषि भूमि में मिले मामले
- पराली प्रबंधन के लिए 18253 किसानों को वितरित किए गए कृषि यंत्र
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में इस बार पराली जलाने के मामलों में भारी कमी देखने को मिली है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के 20 नवंबर तक के आंकड़ों की बात करें तो इस बार पराली जलाने से अधिक गैर कृषि भूमि पर आग या फिर कचरे में आग के मामले सामने आए हैं। इस बार वर्ष 2020 की तुलना में 92 प्रतिशत और पिछले वर्ष की तुलना में 72 प्रतिशत तक पराली जलाने के मामलों में कमी देखने को मिली है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अभी 20 नवंबर तक एक्टिव फायर लोकेशन (एएफएल) के कुल 592 मामले चिह्नित किए गए। विभाग ने इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के ब्योरे के बाद संबंधित जिलों में 590 मामलों की 19 नवंबर तक जांच की। इनमें सिर्फ 230 स्थानों पर पराली जलते हुए पाई गई और 356 अन्य प्रकार की आग से जुड़े मामले मिले व चार मामले समान स्थान (सेम लाॅकेशन) के थे। विभाग ने जांच के बाद प्रत्येक घटना का ब्योरा भी तैयार किया है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का कहना है कि किसानों से बार-बार यही अनुरोध किया गया कि वह पराली न जलाएं। इसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। विभागीय अधिकारियों ने भी मेहनत की है।
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गैर कृषि भूमि पर भी आग के मामले मिले
विभागीय ब्योरे के अनुसार अंबाला में जांच के दाैरान 5 मामले जिले की सीमा के बजाय पंजाब के तिवाना में पाए गए। हिसार में 4 आग के मामले पुष्ट नहीं हो सके और हिसार के बांडाहेडी गांव के बजाय दूसरे जिले की सीमा में दोनों मामले मिले। फरीदाबाद में 4 मामलों में कचरा जलते हुए मिला और सभी पर 25-25 हजार का जुर्माना लगाया गया। फतेहाबाद में 4 एक्सीडेंटल(घटना), 39 मामले चिह्नित नहीं हुए और 3 मामले गैर कृषि भूमि में पाए गए। कैथल में 43, जींद में 66, रोहतक में 33 स्थानों पर पराली के बजाय गैर कृषि भूमि पर आग के मामले मिले।
पराली कम जलेगी तो प्रदूषण का स्तर कम होगा : राठी
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार प्रदेश में एक्टिव फायर लोकेशन (एएफएल) के मामलों में गिरावट दर्ज की गई। 2020 में 15 सितंबर से 20 नवंबर तक 3884 मामले थे। इसी अवधि में 2021 में 6464, 2022 में 3491 मामले चिह्नित किए थे। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सेवानिवृत वैज्ञानिक रणबीर राठी का कहना है कि कुल प्रदूषण में पराली जलाने से करीब 16 से 20 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी हो सकती है। पराली कम जलने से प्रदूषण भी कम होगा।
दोगुना जुर्माना, रेड व येलो जोन पर नोडल अधिकारी तैनात
इस बार पिछले वर्षों की तुलना में पराली जलाने वालों पर दोगुना जुर्माना यानी 5000 से 30000 रुपये तक जुर्माना किसानों पर लगाया गया। निगरानी के लिए करीब 10 हजार नोडल अधिकारी व सुपरवाइर तैनात किए गए। उद्योगों के माध्यम से इस बार 24.82 लाख मीटि्रक टन पराली का प्रबंधन होगा और यह प्रक्रिया जारी है। इस बार किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये के हिसाब से पराली प्रबंधन के लिए अनुदान की प्रक्रिया जारी है। करीब 430 करोड़ रुपये अनुदान मिलेगा।
जिलों में एक्टिव फायर लोकेशन के मामले चिह्नित :
जिला आग के मामले पराली जलाने के मामले
जींद 171 101
फतेहाबाद 84 37
हिसार 65 24
सोनीपत 58 11
कैथल 57 11
रोहतक 39 05
सिरसा 35 12
करनाल 18 13
पलवल 14 8
कुरुक्षेत्र 11 3
झज्जर 10 1
यमुनानगर 7 2
अंबाला 6 0
भिवानी 6 0
फरीदाबाद 4 0
पानीपत 4 2
चरखी दादरी 1 1
मेवात 1 0
पंचकूला 1 0
नोट : पराली जलाने के मामले 19 नवंबर और एएफएल के मामले 20 नवंबर तक।
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बीते साल 645 पर और इस बार अभी तक 263 पर हुई कार्रवाई
वर्ष 2024 की बात करें तो पराली जलाने की निगरानी के कार्य में लापरवाही बरतने पर 665 नोडल अधिकारियों और सुपरवाइजरों व दूसरे अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। बीते वर्ष 35 कर्मचारियों को चार्जशीट, 28 कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। इसी तरह से 582 को कारण बताओ नोटिस थमाए गए थे। इस वर्ष 20 नवंबर तक 258 नोडल व सुपरवाइजरों को कारण बताओ नोटिस दिए जा चुके हैं। हिसार में 5 नोडल अधिकारी व सुपरवाइजर निलंबित किए जा चुके हैं और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जींद, हिसार और फतेहाबाद के उपायुक्तों को निगरानी में लापरवाही के लिए नोटिस दे चुका है। इस बार अभी तक इन्हीं जिलों में सर्वाधिक मामले चिह्नित किए गए हैं। कृषि विभाग 12.25 लाख रुपये का जुर्माना लगा चुका है।
पराली जलाने पर हुई कार्रवाई का वर्षवार ब्योरा
वर्ष आग के मामले जुर्माना (लाख रुपये में) एफआईआर चालान रेड एंट्री
2021 3626 80.12 09 3626 0
2022 2641 61.90 05 2441 0
2023 1373 46.90 198 1782 0
2024 1406 16.27 655 638 1218
2025 (अब तक) 592 12.25 220 ब्योरा नहीं 238
स्रोत : हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।