चंडीगढ़। 14 दिसंबर 2025 रविवार को हरियाणा में आयोजित स्पेशल संडे इम्यूनाइजेशन अभियान अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका है। सुबह 9:30 बजे तक जारी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार प्रदेशभर में 311 सत्र नियोजित थे लेकिन इनमें से केवल 63 सत्र (20 फीसदी) ही आयोजित हो पाए। पूरे प्रदेश में कुल 31 लाभार्थियों का ही टीकाकरण हो सका जबकि प्रति सत्र औसत टीकाकरण 0.5 रहा जो चिंता का विषय है। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा ने सवाल उठाए हैं।
एसोसिएशन की ओर से जारी जिलावार आंकड़ों में करनाल (67 फीसदी), जींद (55), रेवाड़ी (45), सिरसा (38) और पानीपत (33) में सत्र का आयोजन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। वहीं, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, हिसार और सोनीपत में सीमित प्रगति दर्ज की गई है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब भिवानी, झज्जर, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, पलवल, पंचकूला, रोहतक और यमुनानगर में एक भी सत्र आयोजित नहीं हो सका। नूंह में सत्र न लगने के बावजूद 4 टीकाकरण दर्ज किए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने यह प्रयोग शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण से वंचित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कवर करने के लिए किया था लेकिन छुट्टी का दिन होने के कारण अधिकांश अभिभावक पारिवारिक या निजी कार्यक्रमों में व्यस्त रहे। परिणामस्वरूप, कई टीकाकरण केंद्रों पर कर्मचारी पूरे दिन लाभार्थियों का इंतजार करते रहे।
एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष शर्मिला देवी, महासचिव सहदेव आर्य और प्रवक्ता संदीप कुंडू ने इसे विभाग का अव्यावहारिक निर्णय बताया है। महासचिव सहदेव आर्य ने कहा कि रविवार को टीकाकरण के आदेश कर्मचारियों के लिए अघोषित शोषण हैं और सप्ताह के कार्य दिवसों में ही ऐसे शिविर लगाए जाने चाहिए।
एसोसिएशन ने मानव संसाधन की भारी कमी, मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्ल्यू) के सैकड़ों खाली पद, कर्मचारियों पर बढ़ते मानसिक दबाव और जीपीएस कैमरे से फोटो भेजने के आदेशों का भी विरोध किया है। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि बिना संसाधन उपलब्ध कराए गए ऐसे फरमान स्वीकार्य नहीं हैं और जल्द ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी।