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राइस मिलरों ने बकाया बोनस, परिवहन, क्रेट-तिरपाल के किराए के भुगतान की भी मांग उठाई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के राइस मिलरों ने कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की वापसी के लिए सरकार से 30 अक्तूबर तक की मोहलत मांगी है। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री और खाद्य आपूर्ति मंत्री से मुलाकात की। प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने अनुरोध किया कि राइस मिलों में 6.69 लाख मीट्रिक टन चावल वापसी के इंतजार में हैं मगर फूड काॅर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) इस चावल को लेने पर रोक लगा चुका है इसलिए तुरंत रोक हटाकर चावल वापसी की शुरूआत की जाए।
राइस मिलरों ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से उनके आवास पर वार्ता की। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने उनकी वार्ता कराई। प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के राज्य प्रधान अमरजीत छाबड़ा, उप प्रधान सतीश सैनी, महासचिव राजेंद्र सिंह, कैथल के जिला प्रधान एडवोकेट बलकार सिंह ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। छाबड़ा ने बताया कि एफसीआई के माध्यम से तुरंत दोबारा से चावल वापसी के लिए शेड्यूल जारी कराने की मांग की गई। एसोसिएशन ने कहा कि 55 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य था मगर धान की खरीद 62 लाख मीट्रिक टन तक हुई। इसलिए सरकार तुरंत हरियाणा का कोटा 62 लाख टन तक निर्धारित कराए। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से यह भी गुहार लगाई कि पिछले वर्ष और इस वर्ष का बोनस देने के लिए तुरंत पत्र जारी किया जाए। धान व चावल से जुड़े लंबित परिवहन का बकाया भुगतान भी मांगा। क्रेट, तिरपाल किराया, मरम्मत, लोडिंग-अनलोडिंग का भुगतान भी दिलाने की मांग की गई है। छाबड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वीरवार को इस प्रकरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और इस समस्या का समाधान कराएंगे। मंत्री राजेश नागर ने बताया कि राइस मिलरों की मांगों को निस्तारित करने के लिए मुख्यमंत्री बेहद गंभीर हैं और जल्द ही अच्छे परिणाम आएंगे। केंद्र सरकार के साथ भी वार्ता जारी है।