मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज से लेकर सुरक्षा तक के मानक तय, हर घटना का रिकॉर्ड व मासिक रिपोर्ट जरूरी,
केंद्रों का पंजीकरण, इलाज की निगरानी और शिकायतों के निपटारे के लिए भी नियम लागू
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग ने हरियाणा मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण विनियम को लागू कर दिया है। इसके तहत सरकारी नियंत्रण वाले मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों को तय न्यूनतम सुविधाएं रखनी होंगी। मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के पंजीकरण, मरीजों के इलाज का रिकॉर्ड रखने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों के पंजीकरण और मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। इनके तहत संकट की स्थिति में पहले ऐसे वैकल्पिक उपाय अपनाने होंगे जिनसे मरीज को बांधने की जरूरत न पड़े। नर्सिंग कर्मचारियों को मरीज को शांत करने और खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने से रोकने की तकनीकों का प्रशिक्षण देना होगा। शारीरिक रूप से रोकने का इस्तेमाल केवल तब किया जा सकेगा जब भर्ती मरीज खुद को या किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में हो। इसके लिए ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अधिकारी या परामर्शदाता मनोचिकित्सक की अनुमति जरूरी होगी। ऐसी हर घटना का अलग रजिस्टर में रिकॉर्ड रखना होगा। मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को वैकल्पिक उपायों का नियमित प्रशिक्षण देना होगा।
संकट से निपटने के लिए बेहोशी या शांत करने वाली दवा के विकल्प पर मरीज अथवा उसके नामित प्रतिनिधि से कानून के अनुसार चर्चा करनी होगी। मरीज को शारीरिक रूप से रोकने से जुड़ी मासिक रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में तैयार करनी होगी। केंद्र के प्रभारी के हस्ताक्षर वाली यह रिपोर्ट महीने के पहले सप्ताह में संबंधित मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड को भेजनी होगी।
अब मरीजों को फर्श पर नहीं सुलाया जा सकेगा। हर मरीज के लिए अलग बिस्तर, गद्दा, तकिया और मौसम के हिसाब से कंबल देना होगा। महिला और पुरुष मरीजों के लिए अलग वार्ड, शौचालय और स्नानघर बनाने होंगे। रात में शौचालय व आपातकालीन निकास तक जाने वाले रास्तों में रोशनी भी जरूरी होगी। वहीं, कोई भी मरीज भविष्य में मानसिक बीमारी के इलाज की स्थिति में अपनी देखभाल और उपचार को लेकर पहले से लिखित निर्देश भी दे सकता है।
छह श्रेणियों में बांटे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र
स्वतंत्र मानसिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेजों के मनोरोग विभाग, बहु-विशेषज्ञता अस्पतालों के मनोरोग वार्ड, स्वतंत्र नशामुक्ति केंद्र, पुनर्वास केंद्र व अन्य संस्थाएं जिनमें डे केयर सेंटर भी शामिल हैं।
स्थायी पंजीकरण के लिए 25 हजार रुपये शुल्क
मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्थायी पंजीकरण के लिए हरियाणा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के पास निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। इसके साथ 25 हजार रुपये का शुल्क देना होगा। प्राधिकरण पात्र मनोचिकित्सकों, नैदानिक मनोवैज्ञानिकों, मानसिक स्वास्थ्य नर्सों और मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का पंजीकरण करेगा। आवेदन के साथ 500 रुपये शुल्क देना होगा। योग्यता और पात्रता की जांच के बाद पंजीकरण संख्या जारी की जाएगी जो पांच साल तक मान्य होगी। इसका नवीनीकरण अवधि समाप्त होने से एक महीने पहले 500 रुपये शुल्क देकर कराया जा सकेगा।
समीक्षा बोर्ड की मासिक बैठक, शिकायत पर तीन दिन में फैसले का प्रयास
जिला मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड की बैठक महीने में कम से कम एक बार होगी। सूचना पांच दिन पहले देनी होगी और अध्यक्ष समेत कम से कम तीन सदस्य जरूरी होंगे। फैसले लिखित व कारण सहित होंगे। मरीज और उसके प्रतिनिधि को पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। केंद्र का निरीक्षण भी बैठक माना जाएगा। इलाज संबंधी शिकायत पर बोर्ड तीन दिन में फैसला करने का प्रयास करेगा। फैसला न होने पर मरीज और उपलब्ध होने पर उसके नामित प्रतिनिधि की सहमति से मनोचिकित्सक नियोजित इलाज जारी रख सकेगा। साइकोसर्जरी के लिए बोर्ड की मंजूरी, मरीज की लिखित सूचित सहमति, मनोचिकित्सक की जरूरत व सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट और चिकित्सा रिकॉर्ड जरूरी होंगे। बोर्ड अतिरिक्त जानकारी भी मांग सकेगा।