जज काे रिश्वत देने की साजिश रचने का एफआईआर में है आरोप
एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर बंसल ने हाईकोर्ट में दाखिल की है याचिका
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट डेवलपर रूप बंसल की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। बंसल ने एफआईआर रद्द करने की मांग वाली दूसरी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी है। बंसल पर आरोप है कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट के एक जज को रिश्वत देने की साजिश रची थी।
उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज है। फरवरी 2025 में बंसल ने पहली बार दायर की गई रद्द याचिका वापस ले ली थी। ऐसा करते हुए कहा गया था कि वे इसे बेहतर विवरण के साथ दोबारा दाखिल करेंगे। अप्रैल 2025 में दूसरी याचिका दायर की गई लेकिन अब उन्होंने इसे भी वापस लेने की गुहार लगाई है।
इस पर न्यायमूर्ति मंजरी नेहरू कौल ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि बंसल ने अपनी पहली याचिका वापसी के तथ्य छिपाए और साफ हाथों से कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया। बंसल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि फरवरी के आदेश की प्रति याचिका के साथ लगाई गई थी इसलिए कुछ भी छुपाया नहीं गया। ईडी की ओर से वरिष्ठ पैनल काउंसल ज़ोहेब हुसैन और लोकेश नारंग ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस केस के इतिहास में कुछ गड़बड़ है।
उन्होंने अदालत को बताया कि पहले मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों के बार-बार रिक्यूज (खुद को अलग करना) और याचिकाओं के बार-बार वापस लेने से बेंच हंटिंग की आशंका और गहरी हो जाती है। हाल ही में स्टेट बार काउंसिल ने रूप बंसल मामले में कथित बेंच हंटिंग पर गंभीर रुख अपनाते हुए 16 वकीलों को तलब किया है। बार काउंसिल ने कहा था कि हमें महाभारत की वह घटना याद आती है जब धृतराष्ट्र के दरबार में ज्ञानी लोगों की चुप्पी के कारण द्रौपदी का चीरहरण हुआ। चुप्पी और निष्क्रियता अन्याय को बढ़ावा देती है।