हरियाणा में आईएएस अफसरों का पुनर्वास किया गया है। रिटायर होने के बाद अफसरों को फिर अहम कुर्सी मिल गई है। सेवानिवृत्ति के बाद अफसरों को आयोगों, प्राधिकरणों और संविधानिक संस्थाओं में अहम पद मिले हैं। हरियाणा में आईएएस अधिकारियों के पुनर्वास की परंपरा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुरू की थी।
हरियाणा में कहा जाता है कि यहां आईएएस रिटायर नहीं होता, बस पद बदलता है। इसकी वजह भी है। सेवानिवृत्ति के बाद कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को विभिन्न आयोगों, प्राधिकरणों और सांविधानिक संस्थाओं में अहम जिम्मेदारियां मिलने के कई उदाहरण हैं।
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सेवानिवृत्त होते ही उनकी नियुक्ति अहम पदों पर होती है। साथ ही अच्छा वेतन, गाड़ी व कोठी भी मिलती है। हालांकि इनमें कुछ अफसर अपवाद भी हैं जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई अहम पद नहीं मिला।
हरियाणा में आईएएस अधिकारियों के पुनर्वास की परंपरा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुरू की थी। हुड्डा के 10 साल के कार्यकाल में सेवानिवृत्त हुए कम से कम छह मुख्य सचिवों को पुनर्वासित किया गया। इस परंपरा को पूर्व सीएम मनोहर लाल ने भी जारी रखा।
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डीएस ढेसी को मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद हरियाणा विद्युत नियामक आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उसके बाद उन्हें मनोहर लाल का मुख्य प्रधान सचिव बनाया गया। मनोहर लाल ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके पचनंदा को हरियाणा लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
एक अन्य आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंगल को हरियाणा राज्य सूचना आयोग के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्वासित किए गए आईएएस अधिकारियों में केके खंडेलवाल भी शामिल हैं जिन्हें हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की गुरुग्राम पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
टीसी गुप्ता को सेवा का अधिकारी का चेयरमैन नियुक्त किया गया
राजन गुप्ता को पंचकूला पीठ का अध्यक्ष बनाया गया। राम निवास को राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। एक अन्य नौकरशाह चंदर प्रकाश को दिसंबर 2017 में राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया था। इसी तरह से वरिष्ठ टीसी गुप्ता को सेवा का अधिकारी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
इन पूर्व अधिकारियों को भी किया गया एडजस्ट
पुनर्वासित किए जाने वाले अधिकारियों में पूर्व आईएएस राजेश खुल्लर भी शामिल हैं। वे मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं। पूर्व मुख्य सचिव संजीव कौशल को सातवें वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके बाद मुख्य सचिव का पद संभालने वाले टीवीएसएन प्रसाद इस समय हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर तैनात हैं।
पूर्व आईएएस ललित सिवाच व सुमेधा कटारिया राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में सदस्य हैं। पूर्व आईएएस समीर पाल सरो क्वालिटी एश्यारेंस अथॉरिटी के चेयरमैन हैं। पूर्व आईएएस अंकुर गुप्ता को राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है।
इन अधिकारियों को नहीं मिली जगह
ऐसा नहीं है कि सभी पूर्व अधिकारियों को सरकार में एडजस्टमेंट मिल जाता है। कुछ ऐसे पूर्व आईएएस हैं0 जिन्हें कोई पद नहीं मिला। इसमें सबसे चर्चित आईएएस अशोक खेमका हैं। खेमका पिछले साल रिटायर हो गए थे।
हालांकि बताया जा रहा है कि उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद कहीं आवेदन भी नहीं किया था। इसी तरह डॉ. राजशेखर वुंडरू को भी अभी तक कोई पद नहीं मिला है। वे दो महीने पहले रिटायर हुए थे।
हरियाणा में 47 आईएएस की कमी
हरियाणा में आईएएस अधिकारियों की भारी कमी के चलते प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। राज्य में 226 स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 179 आईएएस अधिकारी ही कार्यरत हैं। यानी 47 पद खाली हैं। इनमें भी एक दर्जन से अधिक अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं।
ऐसे में कई अधिकारियों को एक साथ तीन से चार विभागों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इसका सीधा असर विभागों के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
अधिकारियों पर बढ़ते अतिरिक्त कार्यभार से प्रशासनिक दक्षता भी प्रभावित होने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त संख्या में अधिकारियों की उपलब्धता सुचारु प्रशासन के लिए जरूरी है।