हरियाणा में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था तकनीकी खामियों के कारण ठप पड़ गई है। प्रदेश के करीब 9300 राशन डिपो पर लगी पुरानी और कंडम हो चुकी बायोमीट्रिक मशीनों के सर्वर बंद होने से लगभग 1.59 करोड़ लाभार्थियों को मार्च का राशन अब तक वितरित नहीं हो पाया है।
प्रदेश के डिपो होल्डरों को वर्ष 2017 में ऑनलाइन सिस्टम के तहत बायोमीट्रिक और दस्तावेज अपलोड करने वाली पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें दी गई थीं। नवंबर 2016 में ट्रायल के बाद जून 2017 से इन्हें पूरी तरह लागू किया गया। इन मशीनों का मासिक किराया करीब 1250 रुपये है लेकिन इनमें केवल बायोमीट्रिक सुविधा ही उपलब्ध है।
कालांवाली क्षेत्र के गांव हस्सू के डिपो होल्डर हरविंदर सिंह गिल के अनुसार पुरानी मशीनों में सर्वर और सॉफ्टवेयर की समस्या अक्सर आती रहती है। पहले कभी-कभी एक-दो दिन राशन वितरण में देरी हो जाती थी लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर है और 10 मार्च तक भी वितरण शुरू नहीं हो पाया। नई मशीनें लगाने की मांग पहले भी विभागीय अधिकारियों के सामने रखी जा चुकी है।
प्रदेश में मार्च तक कुल 39,88,155 राशन कार्ड हैं। एक कार्ड पर औसतन चार सदस्यों के हिसाब से लगभग 1 करोड़ 59 लाख 52 हजार 620 लोग सरकारी राशन पर निर्भर हैं।
ऑल राशन डिपो होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के मीडिया प्रभारी गुरतेज सिंह सोढ़ी का कहना है कि मशीनों के कंडम होने और सर्वर समस्या के कारण पूरे प्रदेश में राशन वितरण प्रभावित है। कई कार्डधारक डिपो होल्डरों से उलझ रहे हैं, जबकि असल में पूरा सिस्टम ही ठप पड़ा है।
प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर का कहना है कि तकनीकी समस्या को जल्द ठीक किया जा रहा है और लाभार्थियों को जल्द ही मार्च महीने का राशन मिल जाएगा। सरकार की ओर से डिपो होल्डरों को 10 हजार नई 5जी आधारित पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें देने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है।