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नशा तस्करों पर कार्रवाई की एक सी कहानी: नाका या बस स्टैंड पर... पैदल या वाहन सवार भागने लगा, पकड़ा गया

Tue, 10 Dec 2024 02:27 PM IST
निवेदिता वर्मा कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अमर उजाला की टीम ने हरियाणा के 22 जिलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज लगभग 300 एफआईआर को खंगाला। इसी आधार पर उजागर हुआ है कि तकरीबन 80 फीसदी मामलों में पुलिस की कहानी मिलती जुलती है। गिरफ्तारी की जगह, वाहन सवार और पैदल नशा तस्कर अलग-अलग हैं, लेकिन उनके पकड़े जाने की कहानी लगभग एक जैसी ही है।
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haryana police - फोटो : फाइल
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विस्तार
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नशा तस्करी से संबंधित लगभग 80 फीसदी एफआईआर में पुलिस की कहानी एक जैसी पाई गई है। नशा तस्कर की गिरफ्तारी नाके पर हुई है या फिर बस स्टैंड पर। गिरफ्तार किए जाने वाला पैदल हो या वाहन सवार... सभी पुलिस को देखकर भागने की कोशिश में पकड़े गए। फिर उसकी जेब या गाड़ी से नशीला पदार्थ बरामद हुआ। वह प्रतिबंधित पदार्थ को लेकर जाने का अनुमति पत्र भी नहीं दिखा सका।

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हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एचएसएनसीबी) ने जनवरी से 10 नवंबर 2024 तक 2273 केस दर्ज कर 4171 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के सामने होती हैं कई चुनाैतियां

चंडीगढ़ पुलिस के क्राइम ब्रांच विंग के रिटायर्ड डीएसपी (गैंगस्टर व नारकोटिक्स) सोनीपत निवासी जगबीर सिंह ने बताया कि एनडीपीएस एक्ट की नियम के तहत कार्रवाई करने के लिए पुलिस के सामने कई चुनौतियां होती हैं। इनमें राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में कार्रवाई, संदिग्ध को तलाशी के लिए धारा 50 का नोटिस देना, कार्रवाई की वीडियोग्राफी, मौके पर कंम्प्यूटराइज कांटे से माप, सीएफएसएल के लिए सैंपल सील करने सहित कई प्रक्रिया शामिल हैं। नाके पर गिरफ्तारी दिखाकर पुलिस प्रक्रिया इत्मीनान से पूरी करती है।
 

गिरफ्तारी के ये पांच तरीके, कहानी एक जैसी

  • पुलिस नाका देखकर संदिग्ध घबराकर भागने की कोशिश करने में गिरफ्तार किया गया।
  • बस स्टैंड पर पुलिस को देखकर संदिग्ध ने तेज कदम से चलकर छिपने की कोशिश की।
  • पुलिस नाके पर संदिग्ध की गाड़ी रोकी, जांच में उसके पास नशा बरामद हुआ।
  • मुखबीर की सूचना के आधार पर घर में स्टॉक रखा था और छापेमारी करके पुलिस ने गिरफ्तार किया।
  • सूचना मिलने पर नाकाबंदी कर जांच के दौरान वाहन सवार या पैदल संदिग्ध युवक को रोककर नशा बरामद किया।

तस्कर कम नशा करने वाले ज्यादा होते हैं गिरफ्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता और एनडीपीएस एक्ट के जानकार मनोज कुमार ने बताया कि नाके पर गिरफ्तारी दिखाकर पुलिस एनडीपीएस एक्ट की मंशा ही खत्म कर देती है। नशा रखने के किसी भी संदिग्ध की तलाशी लेने से पहले उसे धारा 50 का नोटिस देकर उसकी सहमति लेनी होती है। किसी के घर, दफ्तर या जनता के बीच से गिरफ्तारी के लिए राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य होती है। नाके पर गिरफ्तारी में पुलिस जांच के दौरान तस्कर को गिरफ्तार दिखाकर कई प्रक्रिया से बच जाती है। पुलिस की गिरफ्तारी में तस्कर कम और नशा करने वाले ज्यादा होते हैं।

एनडीपीएस एक्ट में प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया

  • संदिग्ध को धारा 50 का नोटिस देकर उसकी तलाशी की सहमति लेना या राजपत्रित अधिकारी के समक्ष तलाशी लेना।
  • पुलिस किसी के घर, दफ्तर या ठिकाने पर शक के आधार पर नहीं बल्कि उसके खिलाफ कुछ पुख्ता सबूत होने पर ही छापा डाल सकती है। इस कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी करनी होती है।
  • तस्कर को गिरफ्तार करने वाला अफसर जांच अधिकारी नहीं बन सकता। उसे अपने समकक्ष दूसरे पुलिस अधिकारी को बुलाकर जांच सौंपनी होती है। इसमें मेडिकल जांच, सैंपल सील, माप व अन्य प्रक्रिया शामिल है।

पुलिस के सामने चुनौतियां और एक सी कहानी की वजह

  • हर बार तस्कर के ठिकाने पर वीडियोग्राफी संभव नहीं होती।
  • धारा 50 का नोटिस देकर संदिग्ध की सहमति लेकर तलाशी करने पर नशे की बरामदगी संभव नहीं होती।
  • ड्यूटी मजिस्ट्रेट (राजपत्रित अधिकारी) में एसडीएम, डीएसपी के अलावा किसी भी विभाग के समकक्ष अधिकारी की ड्यूटी लगती है, लेकिन उनके आने में पुलिस को लेट-लतीफी का सामना करना पड़ता है। इस पूरी कार्रवाई में काफी समय लगता है, तब तक दूसरे विभाग के अधिकारी को रोकना भी मुश्किल होता है।
  • तस्कर के खिलाफ जनता गवाह नहीं बनती।
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नशा तस्करों को सजा मिलने की दर

साल                दर्ज मामले                 सजा की दर
2017                  2200                       45.9
2018                  2587                       54.6
2019                  2677                        37.3
2020                  3060                       44.1
2021                  2741                        57.0
2022                  3815                        49
2023                  3823                         52
2024                  4171                         57

पिछले कुछ वर्षों में एक जैसी कहानी में बदलाव आया है। अभी पुलिस तस्कर के सही लोकेशन को दिखा रही है। एनडीपीएस एक्ट के सख्त मामले में पुलिस के सामने कई चुनौतियां भी होती है। इनमें जैसे एक केस में तीन जांच अधिकारी व्यस्त हो जाता है, मजिस्ट्रेट का समय पर पहुंचना भी मायने रखता है। इन मामले में पारदर्शिता लेकर आने, पुलिस को सक्षम बनाने के लिए अपने कार्यकाल में डीजीपी हरियाणा को लिखा था कि जहां से तस्कर पकड़े जाएं उसकी जीपीएस लोकेशन लेकर जांच अधिकारी कंम्प्यूटर ऑपरेटर को भेजे ताकि एफआईआर की डिटेल्स भरते समय रिकवरी स्थान को स्पष्ट दिखाया जाएं। इससे तस्करों के पकड़ने वाले स्थानों की मैपिंग की जाएं ताकि हॉट-स्पॉट का आसानी से पता चल पाएं। इससे केस मजबूत होगा।  - श्रीकांत जाधव, पूर्व एडीजीपी, हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
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