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धान घोटाला: आगामी गेहूं की खरीद में गड़बड़ी रोकने पर सख्त योजना के आदेश

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- अब आईएएस अधिकारी के सुपरविजन में निगरानी कमेटी भी बनेगी
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- खाद्य व आपूर्ति विभाग और मंडी बोर्ड को गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त कार्ययोजना तैयार करने के आदेश
चंडीगढ़। प्रदेशभर की मंडियों में धान की खरीद के दौरान घोटाला और सरकारी अधिकारियों के स्तर पर अनियमितताओं को लेकर आगामी गेहूं खरीद के सीजन में सख्त योजना तैयार करने के आदेश दिए गए है। खाद्य व आपूर्ति विभाग और मंडी बोर्ड सभी अनियमितताओं पर बारीकी से जांच करने के बाद एक-एक बिंदु पर कार्ययोजना तैयार करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि आगामी गेहूं खरीद में गड़बड़ियां दोहराई न जाए। साथ ही एक आईएएस अधिकारी के सुपरविजन में निगरानी कमेटी भी बनेगी। खाद्य व आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव डी सुरेश की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए गए है।


गेट पास के अतिरिक्त मंडियों में तैयारियों को लेकर ढिलाई बरतने में सीधे जिम्मेदार अधिकारी पर एक्शन होगा। इनमें उठान की व्यवस्था के टेंडर सहित अन्य व्यवस्थाएं शामिल है जो मंडी बोर्ड को अनाज की खरीद से पहले करनी होती है। सूत्रों की माने तो इन गतिविधियों में देरी के कारण भी किसानों को काफी अनियमितताओं का सामना करना पड़ा है।
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सात दिसंबर को प्रधान सचिव डी सुरेश ने करनाल और कुरुक्षेत्र के स्थानीय अधिकारियों की बैठक ली। इन्हीं दोनों जिलों में सबसे अधिक धान घोटाले का मामला उजागर हुआ है। इस दौरान निर्देश दिए कि आगामी चार दिन के अंदर सभी राइस मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन पूरी की जाए। इसके अतिरिक्त अभी तक जिन जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका उजागर हुई है उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी जवाब मांगा है।

इधर, हरियाणा सिविल सेवा (दंड व अपील) के रूल 4 बी के तहत हरियाणा सरकार ने धान घोटाले में आठ जिलों के 39 मंडी सचिवों को भी चार्जशीट कर दिया है। इन सभी पर गेट पास काटने में अनियमितताएं बरतने के आरोप हैं।
अधिकतर मंडियों में मंडी से बाहर के आईपी एड्रेस पर गेट पास काटे गए हैं। इससे पहले सरकार की ओर से बाजरा और धान घोटाले में दस अधिकारियों के खिलाफ निलंबन व एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, जिन मंडी सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की गई है वे करनाल, कैथल, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, फतेहाबाद, हिसार, जींद में तैनात थे।
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गौरतलब हो कि हरियाणा में पीआर धान की खरीद का लक्ष्य 54 लाख मीट्रिक टन था जबकि सरकार की ओर से 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। सरकार की ओर से मांगीं गई रिपोर्टों में डीसी की जांच में छह जिलों में गड़बड़ी मिली है।
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