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Chandigarh-Haryana News: पांच जिलों के सीएमओ की पीएनडीटी के तहत मिलीं शक्तियां वापस लेने के आदेश

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लिंगानुपात: अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल और सिरसा में सुधार नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। लिंगानुपात में सुधार नहीं कर पाने वाले अधिकारियों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राज्य टास्क फोर्स ने पाया है कि पांच जिलों अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल और सिरसा में लिंगानुपात में कोई खास सुधार नहीं हो पाया। पिछले साल की तुलना में लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने इन पांचों जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) से गर्भावस्था पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीएनडीटी) अधिनियम की शक्तियां वापस लेकर पड़ोसी जिले के सीएमओ को दिए जाने के आदेश दिए।
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इन जिलों के पीएनडीटी अधिनियम के नोडल अधिकारियों को भी चार्जशीट करने के आदेश जारी हुए हैं। साथ ही इन अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं। सुधीर राजपाल ने यह निर्देश राज्य टास्क फोर्स की बैठक में दिए। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक रिपुदमन सिंह ढिल्लों व अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
एचसीएस व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष दस्ते गठित किए जाएंगे
अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने कहा कि नए सीएमओ तुरंत इन जिलों का कार्यभार संभालें और लिंगानुपात में सुधार के लिए काम शुरू करें। इन जिलों में अवैध गर्भपात को रोकने व निगरानी के लिए एचसीएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष राज्य दस्ते (स्क्वॉड) गठित किए जाएंगे। जिन जिलों ने लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार हासिल किया है, उन जिलों को उनके प्रयासों के लिए प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा।
इस साल राज्य का लिंगानुपात सुधरकर 905 हुआ

अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने बताया कि सरकार के निरंतर प्रयासों से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इस वर्ष एक जनवरी से 28 जुलाई तक राज्य का लिंगानुपात सुधरकर 905 हो गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 899 था। उन्होंने कहा कि 12 सप्ताह से अधिक के गर्भपात के उन मामलों में रिवर्स ट्रैकिंग लागू की जा रही है, जहां महिलाओं की पहले से ही एक या अधिक बेटियां हैं। पिछले सप्ताह रिवर्स ट्रैकिंग के संदिग्ध मामलों में 10 और एफआईआर दर्ज की गईं।
अवैध गर्भपात में शामिल अस्पतालों की सरकारी सुविधाएं बंद करने के निर्देश
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि अवैध गर्भपात में शामिल डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द किए जाएं। ऐसे सभी केंद्रों व क्लीनिकों को सील किया जाए, जो इस तरह के कदाचार में शामिल पाए जाते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे अस्पतालों और केंद्रों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध करने से हटा दिया जाए और केंद्रों को दी जाने वाली अन्य सरकारी सुविधाएं भी बंद कर दी जाएं। डायलेशन और क्यूरेटेज (डीएंडसी) प्रक्रिया की आड़ में अवैध गर्भपात करने वाले केंद्रों की भी पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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अवैध गर्भपात में शामिल डॉक्टरों की सूचना देने पर मिलेगा एक लाख का इनाम

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि लिंग निर्धारण परीक्षण समेत अवैध गर्भपात प्रथाओं में शामिल डॉक्टरों/झोलाछाप डॉक्टरों की प्रामाणिक और सटीक जानकारी संबंधित सीएमओ को देने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
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