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जमानत मिल जाने के बाद उसे सामान्य परिस्थिति में नहीं कर सकते रद्द : हाईकोर्ट

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-जमानत निजी स्वतंत्रता से जुड़ा मामला, इसे यूं ही नहीं छीना जा सकता
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-गंभीर परिस्थितियों या शर्तों के उल्लंघन पर ही जमानत की जा सकती है रद्द


अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि एक बार जमानत मिलने पर उसे यूं ही सामान्य परिस्थितियों में रद्द नहीं किया जा सकता। जमानत रद्द करने के लिए ठोस और विश्वसनीय कारण होना जरूरी है, सिर्फ आशंकाओं या अनुमान के आधार पर ऐसा करना गलत होगा।
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शिकायतकर्ता ने अक्टूबर 2022 में धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपी को रोहतक के सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की हाईकोर्ट से अपील की थी। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों को प्रमाणित करने में असफल रहा और सरकार ने भी यह नहीं बताया कि आरोपी जांच से बच रहा है या सहयोग नहीं कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि आरोपी ने जमानत का दुरुपयोग किया है या न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है, तब तक जमानत रद्द नहीं की जा सकती। जस्टिस संदीप मौदगिल की ने कहा कि जमानत रद्द करने के लिए बेहद मजबूत और असाधारण परिस्थितियों का होना आवश्यक है। इस विषय पर कोई तयशुदा नियम नहीं है, यह विभिन्न पहलुओं के संतुलन पर निर्भर करता है। इनमें अपराध की प्रकृति, सजा की गंभीरता और आरोपी की संलिप्तता की प्रथम दृष्टया स्थिति शामिल है। जस्टिस मौदगिल ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन परिस्थितियों में जमानत रद्द की जा सकती है, उनमें आरोपी का फिर से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होना, सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश, गवाहों को धमकाना, जांच से बचने की कोशिश या जमानत की शर्तों से बचने की प्रवृत्ति शामिल है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है, जिसे यूं ही नहीं छीना जासकता।
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