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Chandigarh-Haryana News: अब हर ग्राम पंचायत गोद लेगी टीबी मरीज, बनेगी नि-क्षय मित्र

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अब हरियाणा के हर गांव में टीबी मरीजों की मदद के लिए पंचायत आगे आएंगी
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नि-क्षय मित्र टीबी मरीजों को पोषण, इलाज और हौसला देने में मदद करेगा
चंडीगढ़। हरियाणा को टीबी (क्षय रोग) से मुक्त बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। अब हर ग्राम पंचायत कम से कम दो नि-क्षय मित्र बनाएगी, जो टीबी मरीजों को गोद लेकर उनकी देखभाल और मदद करेंगे। विकास व पंचायत विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
विभाग के अनुसार ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई टीबी मरीज ऐसे हैं, जिन्हें किसी भी तरह की सहायता नहीं मिल रही है। ऐसे मरीजों की सूची पंचायतों को दी जाएगी, ताकि उन्हें जल्द से जल्द गोद लेकर सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा अब हर ग्राम पंचायत को जागरूकता अभियान ही नहीं चलाना होगा, बल्कि टीबी मरीजों की पहचान, जांच, उपचार और पोषण सहायता सुनिश्चित करने में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
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इसके लिए पंचायतों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ग्राम पंचायतों को अपनी विकास योजना में टीबी अभियान के लिए स्थानीय संसाधन और बजट का भी प्रावधान करना होगा। जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बलगम के नमूने जांच केंद्र तक भेजने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर भी पंचायतें खर्च कर सकेंगी। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ मरीजों का इलाज कराना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर पोषण, मानसिक सहयोग और सामाजिक समर्थन देना भी है। विभाग ने निर्देश दिए है कि इस अभियान को गंभीरता से लागू करें, ताकि गांव-गांव तक हर टीबी मरीज को समय पर इलाज और जरूरी सहायता मिल सके। स्टेट टीबी अधिकारी डाॅ. राजेश राजू ने कहा कि हरियाणा में करीब साढ़े छह हजार पंचायतें हैं। यदि एक पंचायत दो-दो भी टीबी मरीजों को गोद लेती हैं तो इससे काफी हद तक टीबी के प्रसार पर नियंत्रण पाने में कामयाबी मिलेगी।
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उच्च जोखिम वाले लोगों को स्क्रीनिंग शिविरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी



ग्राम सभाओं में नियमित रूप से टीबी पर चर्चा कर लोगों को बीमारी के लक्षण, जांच और मुफ्त इलाज की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। पंचायतों को गांव में पोस्टर, वाल पेंटिंग और अन्य प्रचार सामग्री लगाकर जागरूकता बढ़ानी होगी, ताकि लोग समय रहते जांच कराएं और बीमारी छिपाने से बचें। पंचायतों को गांव के बुजुर्गों, कुपोषित लोगों, मधुमेह के मरीजों, धूम्रपान करने वालों और टीबी मरीजों के परिवारों जैसे उच्च जोखिम वाले लोगों को स्क्रीनिंग शिविरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी गई है। सरपंचों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अभियान के दौरान आयुष्मान आरोग्य शिविरों में भाग लेने और लोगों को जांच के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। अभियान के तहत पंचायतों को खांसी के दौरान मुंह ढकने, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचने, स्वच्छता बनाए रखने और टीबी से जुड़े सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए भी विशेष अभियान चलाने होंगे।
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