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Chandigarh-Haryana News: एचएसवीपी के 3 अफसरों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

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- साढ़े सात साल से आयोग के आदेश का पालन न करने पर हुई कार्रवाई
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- 84 वर्षीय आवंटी को अब तक न भूखंड का कब्जा मिला और न 12 प्रतिशत ब्याज

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। गुरुग्राम के सेक्टर-52 के एक भूखंड का कब्जा और ब्याज दिलाने के मामले में आदेश की अवहेलना करने पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के तीन बड़े अधिकारियों के गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। इनमें पंचकूला स्थित मुख्य प्रशासक, गुरुग्राम के प्रशासक और संपदा अधिकारी-द्वितीय शामिल हैं। हरियाणा राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने यह कार्रवाई 84 वर्षीय आवंटी अशोक महाजन की याचिका पर की है। आरोप है कि आयोग के वर्ष 2019 के आदेश का अब तक पालन नहीं हुआ।

महाजन को वर्ष 2003 में सेक्टर-52 में आवासीय भूखंड आवंटित किया गया था। तीन साल बाद वर्ष 2006 में प्राधिकरण ने कब्जा देने की पेशकश की लेकिन मौके पर बुनियादी सुविधाएं पूरी नहीं थीं। भूखंड तक पक्की सड़क नहीं थी। बिजली और सड़क प्रकाश की व्यवस्था भी नहीं थी।
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महाजन ने अप्रैल 2017 में उपभोक्ता आयोग में अपील कर कहा कि सुविधाएं विकसित किए बिना कब्जा देने की कोशिश की गई और प्राधिकरण के पास जमा रकम पर उन्हें उचित ब्याज भी नहीं मिला है। मामला तब और उलझ गया जब जुलाई 2018 में मौके के निरीक्षण के बाद एचएसवीपी ने कब्जे की पेशकश वापस ले ली। निरीक्षण में भूखंड की सीमा के अंदर सीवर लाइन भी मिली। प्राधिकरण ने कहा था कि अनुमान मंजूर होने के बाद लाइन को हटाया जाएगा।

29 जनवरी 2019 को आयोग ने एचएसवीपी को जमा रकम पर संबंधित तारीख से 12 प्रतिशत ब्याज देने और तीन महीने में कब्जा सौंपने का आदेश दिया। महाजन के मुताबिक आदेश पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने 23 सितंबर 2019 को आदेश लागू कराने के लिए निष्पादन याचिका दायर की।
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एचएसवीपी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में 975 दिन की देरी से याचिका दायर की। राष्ट्रीय आयोग ने 8 मई 2024 को देरी माफ करने से इनकार करते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बावजूद आदेश के पालन का विवाद जारी रहा।
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