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Chandigarh-Haryana News: अमेरिका में हत्या-फायरिंग से अंतरराष्ट्रीय गैंगवार बेनकाब, प्रत्यर्पण की राह आसान

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- एसटीएफ की पूछताछ के जरिये रोहित गोदारा–गोल्डी बराड़ गैंग के विदेश से संचालित नेटवर्क पर कसा जा रहा शिकंजा
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चंडीगढ़। विदेश को सुरक्षित ठिकाना बनाकर आपसी दुश्मनी में गैंगवार कराने वाले हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टरों के खिलाफ अब शिकंजा कसता दिख रहा है। हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की ताजा कार्रवाई ने न सिर्फ अमेरिका में हुई हत्या और फायरिंग की घटनाओं का पर्दाफाश किया है बल्कि गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को भी निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया और आसान व तेज होगी।

10 जनवरी को एसटीएफ ने रोहित गोदारा–गोल्डी बराड़ गिरोह के संचालन में शामिल चार सदस्य रमन, लोकेश सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी अमेरिका में बैठकर लॉरेंस बिश्नोई गुट से जुड़े लोगों पर टारगेट किलिंग और फायरिंग करा रहे थे। जांच के मुताबिक 23 दिसंबर 2024 को कैलिफोर्निया में सुनील यादव की हत्या और अक्तूबर 2025 में फ्रेस्नो में गैंगस्टर हैरी बॉक्सर पर हमला इसी गिरोह की अंदरूनी जंग का नतीजा था।
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एसटीएफ सूत्रों के अनुसार सुनील यादव की हत्या के लिए एक अमेरिकी शूटर को 2,500 डॉलर का भुगतान किया गया था जबकि हैरी बॉक्सर पर फायरिंग के लिए 7,500 डॉलर दिए गए। रमन ने सहयोगी बलराज, रविंदर और अमेरिकी नागरिक विल सहित अन्य साथियों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। बरामद विदेशी हथियार और जिंदा कारतूस इस बात की पुष्टि करते हैं कि गैंग का नेटवर्क पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि फिरौती, हथियारों की सप्लाई, फंडिंग और टारगेट तय करने की पूरी रणनीति अमेरिका में बनाई जाती थी जबकि इसके परिणाम हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान में दिखाई देते थे। एसटीएफ प्रमुख सतीश बालन के अनुसार रमन 2017 में अमेरिका गया था और 2022 में उसे ग्रीन कार्ड मिला। हैरी बॉक्सर पर हमले के बाद वह महज दो दिनों में ही कैलिफोर्निया से मुंबई होते हुए भारत लौट आया था।
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प्रत्यर्पण की दिशा में लगातार हो रहे प्रयास
अंतरराष्ट्रीय अपराध के ठोस सबूत मिलने के बाद हरियाणा पुलिस और एसटीएफ अब तक 5 कुख्यात गैंगस्टरों का विदेश से प्रत्यर्पण करा चुकी है जबकि 10 से अधिक गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अमेरिका, कंबोडिया, फिलीपींस और यूरोपीय देशों में चल रही है। इंटरपोल रेड नोटिस, लुकआउट सर्कुलर और विदेश मंत्रालय के सहयोग से केस मजबूत किए जा रहे हैं। एसटीएफ की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक प्रहार मानी जा रही है।
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