स्वास्थ्य विभाग ने राज्य सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा
चंडीगढ़। हरियाणा के कई अस्पतालों में एमआरआई की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को निजी अस्पताल के धक्के खाने पड़ते हैं। कई विधायकों ने बीते विधानसभा सत्र में एमआरआई की सुविधा नहीं होने का मुद्दा भी उठाया था। स्वास्थ्य विभाग अब एमआरआई की सुविधा आउटसोर्श करने जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल पांच जिलों में यह सुविधा शुरू होगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव बनाकर हरियाणा सरकार को भेज दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डा. मनीष बंसल ने बताया, विभाग ने हिसार, जींद, मेवात, सोनीपत और कैथल में यह सुविधा शुरू करने का फैसला किया है। इन अस्पतालों में एमआरआई की सुविधा नहीं है। अब इन अस्पतालों के मरीजों की आउटसोर्श कर एमआरआई की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। जिस कीमत पर सरकार अस्पताल में सुविधा उपलब्ध होती, उतने ही रेट पर आउटसोर्श के जरिये एमआरआई की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। हमने फाइल बनाकर सरकार को भेज दी है। जल्द ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही इसके टेंडर लगाए जाएंगे और जो भी सेंटर सरकारी रेट या उससे कम में एमआरआई की सुविधा उपलब्ध करवाएगा, उसे मंजूरी दी जाएगी। सरकारी अस्पताल में एमआरआई की सुविधा 2700 रुपये लगते हैं, जबकि निजी संस्था में चार हजार रुपये से इसकी शुरुआत होती है। उल्लेखनीय है कि जब अनिल विज स्वास्थ्य मंत्री थे तो उस दौरान उन्होंने एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा सरकारी अस्पताल में होने की बात कही थी। मगर कई अस्पतालों में जगह नहीं होने और रेडियोग्राफर की नियुक्ति नहीं होने से मरीजों को एमआरआई की सुविधा नहीं मिल पा रही थी।
सोनीपत के विधायक ने उठाया था मुद्दा
बीते बजट सत्र के दौरान सोनीपत के भाजपा विधायक निखिल मदान ने अस्पताल में एमआरआई की सुविधा का मुद्दा उठाया था।
उन्होंने कहा था कि उनके अस्पताल में एमआरआई की सुविधा नहीं है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने भरोसा दिलाया था कि सिविल अस्पताल में जल्द ही यह सुविधा उपलब्ध होगी।