कानून व्यवस्था पर स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं करने पर कांग्रेस विधायकों ने की नारेबाजी
सर्वदलीय बैठक के बाद में कांग्रेस का प्रस्ताव मंजूर, 26 को होगी चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे के भेंट चढ़ गया। राज्य की कानून व्यवस्था पर कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए जाने पर विपक्षी विधायकों ने जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस विधायकों की मांग थी कि शोक प्रस्ताव के तुरंत बाद कानून व्यवस्था पर चर्चा की जाए मगर विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि पहले प्रश्नकाल होगा उसके बाद प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इस पर कांग्रेस के विधायक भड़क गए और नारेबाजी करते हुए वेल तक पहुंच गए। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। तीन घंटे में छह बार कार्यवाही स्थगित हुई। हंगामे को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन के बीच में ही सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसके बाद कांग्रेस का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया। कानून व्यवस्था पर 26 अगस्त को चर्चा होगी।
इससे पहले मानसून सत्र की कार्यवाही शुक्रवार दोपहर दो बजे शोक प्रस्ताव से शुरू हुई। शोक प्रस्ताव खत्म होते ही विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा। इस बीच कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था और बहन-बेटियों की हत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, हमने राज्य की कानून व्यवस्था पर स्थगन प्रस्ताव दिया है। उसे मंजूर कर चर्चा करवाई जाए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अभी प्रश्नकाल चलने दीजिए। सदस्यों ने अपने प्रश्न लगाए हुए हैं। क्या आप लोग प्रश्नकाल को महत्वपूर्ण नहीं समझते।
इस पर कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़, बलराम दांगी, विकास सहारण और इंदुराज नवराल ने नारेबाजी शुरू कर दी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह नया रिवाज नहीं चलेगा। दिल्ली में जो माहौल बनाया गया था उसे हरियाणा में चलने नहीं दिया जाएगा। इस पर कांग्रेस विधायकों ने बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का क्या हुआ-क्या हुआ के पोस्टर लहरा दिए। उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया। पांच बजकर 24 मिनट तक छह बार सदन स्थगित हुआ।
कांग्रेस विधायक तीन बार वेल में पहुंचे
हंगामे के दौरान कांग्रेस के विधायक तीन बार वेल में पहुंचे। विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें कई बार चेताया कि वे वेल तक न आएं। नए रीति-रिवाज न शुरू करें। कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी के जवाब में सत्ता पक्ष ने भी भारत माता की जय के नारे लगाए।
मेरे लिए विपक्ष का नेता होना या न होना मायने नहीं रखता : हुड्डा
विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने हंगामा कर रहे कांग्रेस विधायकों से कहा कि आपको ये अधिकार किसने दिया? क्या आप सदन में अध्यक्ष को बोलने नहीं देंगे? आप लोगों ने प्रश्नकाल तक नहीं चलने दिया। यह निंदनीय है। यह गली-मोहल्ले की सभा नहीं है। उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से कहा कि आप सदन में काफी मर्यादित रहते हैं। आप सबसे वरिष्ठ हैं। आप विपक्ष के नेता नहीं हैं, लेकिन सदन आपको विपक्ष का नेता का सम्मान देता है। इस पर हुड्डा ने कहा कि आपने मेरा नाम लिया है इसलिए मैं खड़ा हुआ हूं। मेरे लिए विपक्ष का नेता होना या न होना मायने नहीं रखता। मैं कहना चाहता हूं कि काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा क्यों नहीं हो रही। यह निंदनीय नहीं है। सदन के अंदर विरोध दर्ज कराना विधायक का अधिकार है।
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विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार : मुख्यमंत्री
हंगामे के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपक्ष का सवाल प्रश्नकाल में लगा है। सरकार विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। हमारी पुलिस ने भिवानी की बेटी के मामले में तेजी से कार्रवाई की है। इनके समय में (विपक्ष) कानून व्यवस्था कैसी थी यह सबको पता है। इनके समय में एफआईआर तक दर्ज नहीं होती थी। हमारे पास सारा रिकॉर्ड मौजूद है। आप तुलना करेंगे तो इनके और हमारे समय की कानून व्यवस्था में जमीन-आसमान का अंतर दिखेगा। विपक्ष कानून व्यवस्था पर राजनीति न करे। इस पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि हमारे समय में हर मामले की एफआईआर दर्ज होती थी। यह व्यवस्था हमने शुरू करवाई थी।
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हंगामे के बीच दो घंटे चली सर्वदलीय बैठक
कांग्रेस विधायकों का हंगामा बढ़ता देख मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। यह बैठक करीब दो घंटे चली। इसमें पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, संसदीय कार्यमंत्री महिपाल ढांडा, कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल, इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला व सावित्री जिंदल मौजूद रहीं।
सर्वदलीय बैठक में सरकार ने कांग्रेस का प्रस्ताव माना
सर्वदलीय बैठक खत्म होने के बाद करीब छह बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने कानून व्यवस्था पर स्थगन प्रस्ताव रखा जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया। हरविंद्र कल्याण ने प्रस्ताव पर 26 अगस्त को चर्चा के लिए सहमति दी।