हरियाणा में अल्पसंख्यकों के हितों की निगरानी और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों को उठाने के लिए हरियाणा में अल्पसंख्यक आयोग बनेगा। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की मंजूरी दे दी है।
आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पांच गैर-सरकारी सदस्य होंगे। सरकार जरूरत के अनुसार सदस्यों की संख्या बढ़ा- घटा सकती है। अध्यक्ष के लिए सामाजिक क्षेत्र में अनुभव और प्रतिष्ठा वाले व्यक्ति का चयन किया जाएगा।
वहीं, उपाध्यक्ष को अल्पसंख्यकों के कल्याण, शिक्षा, अधिकारों की सुरक्षा, सामाजिक विकास या आर्थिक सशक्तिकरण का अनुभव होना जरूरी होगा। आयोग के कामकाज के लिए हरियाणा सिविल सेवा का एक अधिकारी सचिव के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
आयोग को सिविल कोर्ट जैसी कुछ शक्तियां मिलेंगी। वह किसी व्यक्ति को बुलाकर पूछताछ कर सकेगा, दस्तावेज मंगा सकेगा और सरकारी दफ्तरों से जरूरी रिकॉर्ड ले सकेगा। गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए भी आयोग आदेश जारी कर सकेगा। जांच के लिए सरकार की मंजूरी से सरकारी एजेंसियों की मदद ली जा सकेगी। आयोग के सामने दिया गया बयान झूठी गवाही के मामले को छोड़कर किसी दीवानी या आपराधिक मामले में उस व्यक्ति के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पद संभालने की तारीख से तीन साल होगा। वहीं, सरकार दिवालिया होने, गंभीर अपराध में सजा, काम करने में असमर्थता, लगातार तीन बैठकों से अनुपस्थित रहने या पद के दुरुपयोग पर उन्हें हटा सकती है। ज्यादातर मामलों में कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा। पद खाली होने पर सरकार नए व्यक्ति को नियुक्त करेगी, जो बचे हुए कार्यकाल को पूरा करेगा।
नए कानून में सदस्यों को हटाने के प्रावधान भी हैं। लगातार तीन बैठकों में बिना अनुमति अनुपस्थित रहने, पद का दुरुपयोग करने, गंभीर मामलों में दोष सिद्ध होने या काम करने में असमर्थ होने जैसी स्थितियों में सरकार कार्रवाई कर सकेगी। वहीं, आयोग सरकार को समय-समय पर रिपोर्ट और सिफारिशें देगा। सरकार को इन सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी विधानमंडल के सामने रखनी होगी।
आयोग के हिस्से ये होंगे मुख्य कार्य
अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनके लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों की निगरानी करना और उन्हें सही तरीके से लागू करने के लिए सरकार को सुझाव देना।
अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों का अध्ययन और शोध करना।
सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भागीदारी की स्थिति देखना और इसे बढ़ाने के उपाय सुझाना।
प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और बढ़ाने के लिए सरकार को सुझाव देना।
अल्पसंख्यकों की समस्याओं और उनकी स्थिति पर सरकार को समय-समय पर रिपोर्ट देना।
अल्पसंख्यकों के कल्याण और विकास से जुड़े मामलों का अध्ययन करना।
अल्पसंख्यकों की शिकायतों पर सुनवाई करना, उनके समाधान के सुझाव देना और अधिकारों से वंचित किए जाने के मामलों को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाना।
अगर किसी मामले को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अपने हाथ में ले लेता है, तो उस मामले में हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अधिकार नहीं रहेगा।
पंजाब चुनाव के मद्देनजर सिख चेहरे पर दांव संभव
हरियाणा सरकार जल्द अल्पसंख्यक आयोग का गठन कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए आयोग में किसी सिख चेहरे को जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि आयोग में नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।