चंडीगढ़। प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित मेडिकल बिलों के निपटारे के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। शिक्षकों व कर्मचारियों की शिकायतों के बाद विभाग ने मेडिकल बिल भुगतान की शक्तियां अधिकारियों में विभाजित कर दी हैं ताकि भुगतान में हो रही देरी खत्म की जा सके।
विभाग में टीजीटी (ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर), पीआरटी (प्राइमरी टीचर), सीएंडवी (क्लासिकल एंड वर्नाक्युलर टीचर) और ईएसएचएम (एलीमेंट्री स्कूल हेड मास्टर) श्रेणी के कर्मचारियों के मेडिकल बिल कई जिलों में एक से तीन साल तक लंबित चल रहे थे। स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी तरह उच्च स्तर पर केंद्रीकृत होने के कारण भुगतान में लगातार विलंब हो रहा था। कई शिक्षकों और कर्मचारियों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों से कर्ज लेना पड़ा, वहीं मेडिकल एडवांस भी समय पर मंजूर नहीं हो पा रहा था।
इसी स्थिति को देखते हुए हरियाणा के महानिदेशक प्रारंभिक शिक्षा डॉ. विवेक अग्रवाल ने आदेश जारी किए हैं। आदेश के तहत अब अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) व अतिरिक्त सचिव स्कूल शिक्षा विभाग को अतिरिक्त शक्तियां दी गईं हैं। ब्यूरो