एमसीयू से जुटाए गए आंकड़े स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पास सुरक्षित रहेंगे और इन्हें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के साथ भी साझा किया जाएगा। खास बात यह है कि यह जानकारी 75 वर्षों तक संग्रहित रखी जा सकेगी, जिससे अपराधी अपना रूप बदलकर भी न्याय से बच नहीं पाएंगे।
अपराधियों की पहचान को और अधिक सटीक व आधुनिक बनाने के लिए हरियाणा की जेलों में अब मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) स्थापित की जाएंगी। महानिदेशक कारागार आलोक कुमार राय ने जानकारी दी कि प्रदेश की 20 जेलों में जल्द ही एमसीयू और फिंगर एनरोल्ड डिवाइसेज (एफईडी) लगाए जाएंगे। इस प्रणाली के जरिए अपराधियों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन तैयार होगा, जिसमें उंगलियों के निशान, चेहरे की विशेषताएं, डीएनए नमूने और रेटिना स्कैन शामिल होंगे।
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यह व्यवस्था दंड प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 के तहत लागू की जा रही है। परंपरागत पहचान तरीकों से आगे बढ़ते हुए यह तकनीक अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने, उनकी ट्रैकिंग और गतिविधियों का पता लगाने में मददगार साबित होगी। एमसीयू से जुटाए गए आंकड़े स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पास सुरक्षित रहेंगे और इन्हें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के साथ भी साझा किया जाएगा। खास बात यह है कि यह जानकारी 75 वर्षों तक संग्रहित रखी जा सकेगी, जिससे अपराधी अपना रूप बदलकर भी न्याय से बच नहीं पाएंगे।
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इन यूनिट्स से प्राप्त फिंगरप्रिंट्स और रेटिना स्कैन सीधे नेशनल ऑटोमैटिक फिंगरप्रिंट्स इन्फॉर्मेशन सिस्टम में अपलोड होंगे। नैफिस में देशभर के अपराधियों, बंदियों और संदिग्धों का डेटा दर्ज होता है, जिससे अपराधियों का नेटवर्क ट्रैक करना और आसान होगा।
महानिदेशक कारागार ने कहा कि यह पहल आपराधिक न्याय प्रणाली को और मजबूत करेगी। अपराधियों का विस्तृत यूनिक डेटा उपलब्ध होने से न केवल उनकी पहचान पुख्ता होगी, बल्कि लंबे समय तक उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। यह कदम प्रदेश में अपराध पर अंकुश लगाने और कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।